शिलाई (सिरमौर)। 21सवीं सदी और विद्युतीकरण के दावे, लेकिन विद्युत उत्पादक राज्य माने जाने वाले हिमाचल के कई गांव ऐसे भी हैं जहां बिजली नहीं पहुंची है। सिरमौर जिला के दुर्गम क्षेत्र शिलाई के कुछ गांव आज भी बिजली की सुविधा से महरूम है। इन गांवों में 21वीं सदी के युग में भी अंधेरा पसरा है। लोग रोशनी के लिए मिट्टी के तेल दीये बनाकर काम चला रहे हैं। आजादी के 70 सालों से यहां सत्ता में काबिज रहे नेता हर चुनाव में ग्रामीणों को बिजली देने का वायदा करने के बाद गायब हो जाते हैं।
जानकारी के अनुसार शिलाई की बकरास पंचायत के रिठोड, पनौल, विराडों व खनियार गांव के करीब 50 परिवार आज भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। लोग मिट्टी के दीये जलाकर गुजारा कर रहे हैं। इनकी सुध न तो सरकार ने ली और न ही प्रशासन ने। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बिजली लाने के कई प्रयास किए। ग्राम सभा की बैठकों में सैकड़ों बार प्रस्ताव पारित किए। कई बार सरकार व प्रशासन को ज्ञापन भेजे। विधायकों को उनके वायदे याद दिलाए लेकिन सारी कोशिशें बेकार साबित हुईं।
क्षेत्र के बारूराम, गुमान सिंह, गीता राम, दलीप सिंह, देशराज, कंठीराम, नकटूराम, पतिराम, बलीराम, केदार सिंह, सूरत सिंह ने बताया कि उनके गांवों में बिजली नहीं है। इस बारे प्रदेश सरकार को कई प्रस्ताव भेजे गए। प्रशासन से अनेकों बार गुहार लगाई गई। नेताओं ने चुनावों में हर बार बिजली पहुंचाने का वायदा किया, लेकिन किसी ने वायदा पूरा नहीं किया।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली न होने से वह बिजली से चलने वाले यंत्रों का आज तक उपयोग नहीं कर पाए हैं। रोशनी के लिए आज भी मिट्टी के तेल के दीए जलाने पड़ रहे हैं। गांव में शादी समारोह हो तो लालटेन का इस्तेमाल करना पड़ता है। स्कूली बच्चों को पढ़ाई में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
उधर, विद्युत उपमंडल शिलाई के टिंबी अनुभाग के जेई महेश चौधरी ने बताया कि बजट का प्रबंधन होते ही गांव में बिजली की लाइन पहुंचा दी जाएगी।
--21सवीं सदी में भी शिलाई के गांवों में बिजली नहीं
-ग्रामीण आज भी रोशनी के लिए जला रहे मिट्टी के दीये
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