अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में सफाई व्यवस्था एक बार फिर ठप हो गई है। कई वार्डों में जंगल कूड़े से भर गए हैं। सड़कों पर भी जगह-जगह गंदगी फैल गई है। पार्षद चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं तो सैहबकर्मी भी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। हालत यह है कि सैहबकर्मियों की तनख्वाह बढ़ाने के बावजूद ज्यादातर वार्डों में नियमित कूड़ा नहीं उठाया जा रहा।
बैनमोर वार्ड में दिवाली के बाद से कूड़ा नहीं उठा है। स्थानीय निवासी सीमा ने बताया कि कर्मचारी 19 अक्तूबर से नहीं आ रहा है। लक्कड़ बाजार एरिया में हफ्ते में एक बार ही कूड़ा उठाया जा रहा है। लोअर खलीणी में तीसरे दिन कूड़ा उठ रहा है। टुटू में तीसरे और चौथे दिन कर्मचारी कूड़ा उठाने पहुंच रहे हैं। वार्ड पार्षद विवेक शर्मा ने बताया कि कर्मचारी नियमित नहीं आ रहे। जो नौकरी छोड़ गए हैं, उनकी जगह निगम ने नए नियुक्त नहीं किए। समरहिल वार्ड में भी दो कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे। पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि सेनेटरी इंस्पेक्टर और सुपरवाइजर से इस बारे में शिकायत कर चुकी हैं लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा रही। बालूगंज के साथ लगते जंगल कूड़े से भर गए हैं। भट्ठाकुफर, सांगटी, पंथाघाटी और मल्याणा में भी नियमित कूड़ा न उठने की शिकायतें आ रही हैं।
पार्षद बना रहे आचार संहिता का बहाना
अपने उम्मीदवार के प्रचार को लेकर वार्ड में घूम रहे पार्षदों को जनता की शिकायतें भी सुननी पड़ रही हैं। जनता नियमित कूड़ा न उठने को लेकर पार्षद को शिकायत कर रहे हैं। वहीं, पार्षद आचार संहिता और निगम प्रशासन की लापरवाही का बहाना बनाकर जल्द व्यवस्था के दावे कर रहे हैं।
मेयर बोलीं, पार्षद भी चेक करें व्यवस्था
मेयर कुसुम सदरेट का कहना है कि जिन वार्डों से ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं, वहां पार्षद खुद भी चेक करें। देखें कि कर्मचारी क्यों ड्यूटी पर नहीं आ रहे? उन्होंने कहा कि नौ नवंबर के बाद निगम खाली पद भरने के लिए चुनाव आयोग से विशेष अनुमति की मांग करेगा। इसके बारे में अफसरों से भी बात की जाएगी।