अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पानी की दरें बढ़ाने वाला नगर निगम अब शहरवासियों को गंदे पानी की सप्लाई कर रहा है। बार-बार सैंपल फेल होने के बावजूद जनता को गंदा पानी पीने को मजबूर किया जा रहा है। आईजीएमसी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक शहर के कई बड़े पेयजल टैंकों से लिए गए पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। ज्यादातर सैंपल नगर निगम के उन पेयजल टैंकों से लिए गए थे, जिनसे हजारों लोगों को पानी सप्लाई किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इनका पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। इनमें पीलिया और इंफेक्शन फैलाने वाला बैक्टीरिया पाया गया है। विकासनगर, जाखू, तवी, फेज थ्री और ढली टैंक से लिए गए पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके अलावा संजौली और कसुम्पटी रिजोरवायर का पानी भी पीने योग्य नहीं पाया गया है। यह पहला मौका है जब एक साथ शहर के कई पेयजल टैंकों के पानी के सैंपल फेल हुए हैं। आईजीएमसी ने 24 और 25 अगस्त को पेयजल टैंकों से पानी के सैंपल भरे थे। मैहली हैंडपंप का पानी भी दूषित पाया गया है।
सैंपल फेल होने के बावजूद पिला रहे गंदा पानी
पेयजल के सैंपल फेल होने के बावजूद शहरवासियों को गंदा पानी पिलाया जा रहा है। संजौली चौक और लक्कड़ बाजार स्थित सार्वजनिक नल के सैंपल कई बार फेल हो चुके हैं। ताजा रिपोर्ट में फिर इनका पानी दूषित पाया गया है लेकिन नगर निगम ने सप्लाई जारी रखी है। निगम दावा करता है कि दूसरी बार सैंपल फेल होने पर सप्लाई रोक दी जाती है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक नलों से आए दिन हजारों लोग पानी पीते हैं। गंदे पानी की सप्लाई से पीलिया और दूसरी जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
मेयर दे रहीं सिर्फ एडवायजरी
नगर निगम महापौर कुसुम सदरेट का कहना है कि निगम स्वच्छ पेयजल सप्लाई देने के प्रयास कर रहा है। जिन टैंकों के सैंपल फेल हो गए हैं, वहां दोबारा सैंपल लेंगे। बरसात के कारण यह दिक्कत पेश आ रही है। जनता से अपील है कि उबालने के बाद ही पानी पीने के लिए इस्तेमाल करें।