भवन मालिकों से जुर्माना भी वसूल कर लिया है। अभी ऐसे ही 18 और मामलों पर भी संयुक्त आयुक्त की अदालत में सुनवाई चल रही है। इनमें से तीन मामलों पर इसी माह फैसला सुनाया जा सकता है। नगर निगम ने शहर में वन विभाग को इस तरह की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। बिना अनुमति पेड़ कटान करने वालों के केस निगम को भेजने को कहा है। निगम जुर्माने के अलावा भवन का नक्शा तक रद्द कर सकता है। शहर में पेड़ या इसकी शाखाएं काटने पर सख्त पाबंदी है। यदि कोई पेड़ घर पर खतरा भी है तो उसे काटने के लिए भी नगर निगम की ट्री कमेटी के जरिये सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। हरे पेड़ों की शाखाएं काटने के लिए भी अनुमति जरूरी है। यह प्रक्रिया लंबी है और कई लोग इससे बचने के लिए गुपचुप पेड़ों का कटान कर रहे हैं। शहर के पर्यावरण प्रेमियों ने नगर निगम के संयुक्त आयुक्त कोर्ट के इस फैसले की सराहना की है।
घरों के साथ लगते पेड़ों की काट दीं शाखाएं
शहर में कई लोग ऐसे भी हैं जो हरे पेड़ों के कारण रुक रही घरों की धूप के लिए इसकी शाखाएं काट रहे हैं। कुछेक लोग बंदरों के आतंक से बचने के लिए घरों के पास पेड़ों की टहनियां कटवा रहे हैं। वन विभाग ने इनके खिलाफ डैमेज रिपोर्ट भी काटी है। इन पर अंतिम सुनवाई नगर निगम के संयुक्त आयुक्त की अदालत में होती है। यहां आदेश जारी होने के अगले ही दिन जुर्माना चुकाना पड़ता है। संयुक्त आयुक्त कोर्ट में इस साल 30 से अधिक मामलों पर सुनवाई चल रही है।
आईटीआई के भवन से सटा पेड़ कटेगा
आईटीआई चौड़ा मैदान के मुख्य भवन से सटे बान के पेड़ को काटने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद शनिवार को पेड़ की टहनियां काटना शुरू कर दी हैं। एक दो दिन के भीतर पेड़ को हटा दिया जाएगा। भवन और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए आईटीआई प्रबंधन ने तीन साल पहले पेड़ काटने के लिए आवेदन किया था। पेड़ के कारण खिड़की से अंदर लैब में पानी जाने से लैब की मशीनें खराब हो रही थीं। इससे प्रशिक्षु भी परेशान थे। पेड़ कट जाने से भवन के अंदर लैब में पानी जाने की समस्या का हल होने की उम्मीद है।