हिमाचल प्रदेश में गेहूं के बाद अब सेब के लिए खाद का संकट हो गया है। गेहूं के लिए हजारों बोरी खाद की मांग अभी पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में सेब की फसल के लिए खाद कब मिलेगी। नवंबर के अंत और दिसंबर में तौलिये बनाने में खाद का इस्तेमाल होता है। हिमफेड के पास खाद का स्टॉक नहीं है। कुल्लू जिले में दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में खाद पहुंचने की उम्मीद है। इससे बागवानों की दिक्कत बढ़ गई है।
बता दें कि बाह्य सराज, कुल्लू, मनाली, बंजार, मणिकर्ण समेत अन्य क्षेत्रों में 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर सेब फसल तैयार होती है। नवंबर के शुरू में सेब के पेड़ों की प्रूनिंग के बाद दिसंबर तक पेड़ों के नीचे तौलिये बनाए जाते हैं। इनमें 12:32:16 समेत पोटाश का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, हिमफेड ने 8000 हजार बैग खाद की डिमांड कुल्लू जिले से भेजी है, लेकिन पहुंच नहीं पाई है।
पौधों की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाती है खाद
12:32:16 खाद छोटे पेड़ों के बढ़ने और पौधों की उपजाऊ क्षमता बढ़ाती है। इससे अच्छी गुणवत्ता का सेब निकलता है। बागवानों के अनुसार 12:32:16 खाद को सेब के लिए उपयुक्त माना गया है, लेकिन अब खाद न आने से बागवानों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
बागवान पोटाश खाद कर कर सकते हैं इस्तेमाल
अगर 12:32:16 बागवानों को नहीं मिलती है तो बागवान नेचुरल पोटाश और सागरिका का मिश्रण वाली खाद का प्रयोग कर सकते हैं। इसका 50 किलो का बैग 1100 रुपये का है, जबकि 12:32:16 खाद के बैग की कीमत 1400 रुपये है। फास्फोरस यूरिया का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
बागवानी से जुड़े हैं 70 हजार बागवान
जिले में 70 हजार बागवान बागवानी क्षेत्र से जुड़े हैं। 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर सेब की फसल होती है। प्रति वर्ष जिले से 25 से 30 लाख सेब की पेटियां हिमाचल समेत देश की अन्य मंडियों में जाती हैं। बागवान हेमराज, सुरेश कुमार, योगराज और तेज सिंह सहित अन्य ने बताया कि 12:32:16 खाद न मिलने से बागवानी संबंधी कार्य रुक गए हैं। इन दिनों बगीचों में तौलिये बनाने में खाद का इस्तेमाल होता है। हिमफेड के पास खाद उपलब्ध नहीं है।
दिसंबर में खाद पहुंचने की उम्मीद : भारद्वाज
हिमफेड मंडी-कुल्लू के प्रभारी किशन भारद्वाज ने बताया कि दिसंबर में 12:32:16 सेब खाद की आने की उम्मीद है। इसके बाद बागवानों को खाद का वितरण किया जाएगा। लगभग 8000 हजार बैग की डिमांड भेजी गई है।