कांग्रेस में बागी नेताओं और पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर करने का सिलसिला जारी है। अब नगर निगम के दो वर्तमान पार्षदों समेत तीन सदस्यों को कांग्रेस पार्टी से बाहर कर दिया गया है।
तीनों को विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के कारण छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
इनमें जाखू वार्ड से कांग्रेस पार्षद अर्चना धवन और लोअर बाजार से पार्षद इंद्रजीत सिंह शामिल हैं। इनके अलावा एक और कार्यकारी सदस्य और पूर्व पार्षद अशोक सूद को भी पार्टी से निष्कासित किया गया है।
जिला कांग्रेस कमेटी शिमला शहर के प्रवक्ता दीपक सुंदरियाल ने बताया कि जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह भुज्जा के दिशा निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई है।
प्रवक्ता ने बताया कि इन तीनों को कुछ दिन पहले चेतावनी देते हुए पार्टी हित में काम करने को कहा गया था। ये सभी पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार नहीं कर रहे थे।
दोनों पार्षद खुलकर पार्टी से बागी हुए पूर्व डिप्टी मेयर हरीश जनारथा के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। दोनों को पार्टी ने कई बार चेताया भी लेकिन ये नहीं माने। इसके बाद इनकी प्राथमिक सदस्यता को छह साल के लिए रद्द कर दिया गया है।
जिलाध्यक्ष प्रदीप भुज्जा ने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में जो भी पदाधिकारी संलिप्त पाया गया है, उसे तुरंत प्रभाव से निष्कासित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में पार्टी हाईकमान से दिशानिर्देश मिले हें।
अध्यक्ष ने बाकी पदाधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी और कार्यकर्ता या सदस्य की पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने की सूचना मिलती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम में अब कांग्रेस के 11 पार्षद
दो पार्षदों को बाहर करने से अब नगर निगम में कांग्रेस के कुल 11 पार्षद रह गए हैं। नए सदन में पहले कांग्रेस के 13 पार्षद थे लेकिन दो पार्षदों के निष्कासन के बाद निगम हाउस में भी कांग्रेस का आंकड़ा कम हो गया है। सदन में भाजपा के 19, जबकि माकपा का एक पार्षद है।
मैं पार्टी का सिपाही, कुछ लोग कर रहे तानाशाही
मैं हमेशा कांग्रेस का सच्चा सिपाही रहा हूं। लेकिन शिमला शहरी कांग्रेस में कुछ लोग ऐसे हैं जो तानाशाही कर रहे हैं। इन्हीं के चलते संगठन का हाल खराब है। हालत यह है कि बूथ पर बिठाने तक को पार्टी को कार्यकर्ता नहीं मिले। इन लोगों के कारण ही कांग्रेस एमसी पर कब्जा नहीं कर पाई। -इंद्रजीत सिंह, पार्षद लोअर बाजार