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बादलों ने रिंक और स् केटरों की उम्मीदों पर फेरा पानी

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बादलों ने स्केटरों की उम्मीदों पर फेरा पानी
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तीन दिन तक दिन-रात मौसम साफ रहा तो ही जमेगी बर्फ
स्केटिंग सेशन को करना पड़ सकता है लंबा इंतजार
अब तक इस सीजन का हुआ सिर्फ एक ट्रायल सेशन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक आइस स्केटिंग रिंक में जमी बर्फ पर स्केटिंग करने की स्केटरों की इच्छा पूरी नहीं हो सकी है। बारिश और उसके बाद से लगातार दो दिनों से आसमान में छाए बादलों के कारण आइस स्केटिंग रिंक और स्केटरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। रिंक में जमी आइस पूरी तरह से पिघल चुकी है। स्केटर बड़ी बेसब्री से स्केटिंग सेशन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मौसम अनुकूल न होने के कारण उनका यह इंतजार और लंबा खिंच सकता है। शिमला आइस स्केटिंग क्लब रिंक में आइस जमाने के प्रयास कर रहा है, मगर तापमान में हुई बढ़ोतरी और लगातार बादलों के कारण यह संभव ही नहीं हो पा रहा है। क्लब में स्कूली छात्रों जिनमें आठ वर्ष से लेकर कॉलेज स्तर तक के छात्र स्केटर शामिल हैं, सदस्यता लेकर बस स्केटिंग सेशन के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। अब तक रिंक में इस सीजन का सिर्फ एक ट्रायल सेशन ही संभव हो पाया है। उसमें भी एक ही कोने में जमी बर्फ पर क्लब के पदाधिकारियों ने ट्रायल किया था। शहर के अधिकतर निजी स्कूलों में आठवीं कक्षा तक की परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं। उनके मनोरंजन का आइस स्केटिंग रिंक सर्दियों में एक सशक्त माध्यम होता है। स्कूली छात्र स्केटर शायरा भारद्वाज, निधांश, प्रणवत, अभय कौशिक, गुरनूर कौर का कहना है कि उन्होंने परीक्षा होने के बाद 31 दिसंबर तक शिमला में रहकर स्केटिंग कर पूरी मस्ती करने का कार्यक्रम बनाया था। लेकिन, अभी तक एक भी सेशन में वे स्केटिंग नहीं कर पाए हैं। 31 दिसंबर के बाद वे छुट्टियों में घूमने निकल जाएंगे। स्केटरों का कहना है कि लगातार बादल और फिर बर्फबारी की संभावना बन रही है, जिसमें बर्फ नहीं जम पाएगी। शायद ही हमारी स्केटिंग की उम्मीद पूरी हो।
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पानी से भर गया रिंक, संभव नहीं बर्फ जमना : बांगा
आइस स्केटिंग क्लब के सचिव भवनेश बांगा का कहना है कि बादलों के कारण सारी जमी बर्फ पिघल चुकी है। अब बर्फ जमाने को कम से कम चार दिन तक दिन-रात मौसम साफ होगा और तापमान जीरो तक पहुंचेगा, तब ही रिंक में बर्फ जम पाएगी। कार्यकारिणी सदस्य राजन भारद्वाज का कहना है कि पिछले साल भी मुश्किल से 12 ही सेशन हो पाए थे। इसमें सबसे अधिक निराशा स्कूली छात्र स्केटरों को होती है।
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