पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले प्रदेश के हजारों छात्रों को स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बड़ी टेंशन दे दी है। बोर्ड ने आवेदन पत्रों में मूल प्रमाण पत्र न होने की खामी बताकर इन्हें नोटिस जारी किया है।
बोर्ड ने लिखा है कि आवेदक 16 जुलाई तक परीक्षा का मूल प्रमाण पत्र भेजें, अन्यथा उनका आवेदन रद्द समझा जाएगा। ऐसे में उनका रीवेल्यूएशन का रिजल्ट नहीं निकाला जाएगा।
बोर्ड की इस शर्त से हजारों छात्र असमंजस में पड़ गए हैं। छात्र प्रमाण पत्र जमा करवाने की तिथि बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं।
इसीलिए टेंशन में हैं छात्र
विद्यार्थी टेंशन में इसलिए हैं, क्योंकि अधिकतर स्कूलों में अभी तक मूल प्रमाण पत्र पहुंचे ही नहीं हैं। ऐसे में उनको मूल प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं। जब उनको मूल प्रमाण पत्र मिला ही नहीं है तो वे बोर्ड में जमा क्या करवाएंगे।
कई स्कूलों में जमा दो के मूल प्रमाण पत्र तो पहुंच गए हैं लेकिन 10वीं के नहीं आए हैं। ऐसे में विद्यार्थी बार-बार स्कूलों के दफ्तरों के चक्कर लगाकर अपने मूल प्रमाण पहुंचने की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि जब प्रमाण पत्र ही नहीं पहुंचे तो फिर वे जमा करवाएंगे क्या?
जुलाई में अनुपूरक परीक्षाएं भी आई आड़े
इस बार अनुपूरक परीक्षाएं जुलाई माह में हुईं। ऐसे में बोर्ड में भी काम बढ़ गया। माना यह भी जा रहा है कि इसी के चलते बोर्ड से बच्चों को मूल प्रमाण पत्र भेजने में देरी हो गई। अगर ऐसा हुआ होगा तो बोर्ड को बिना मूल प्रमाण पत्र भेजे बच्चों को नोटिस जारी नहीं करने चाहिए थे।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डा. हरीश गज्जू का कहना है कि विद्यार्थियों के मूल प्रमाण पत्र भेज दिए गए हैं। कई विद्यार्थी तो मूल प्रमाण पत्र जमा करवाने के बाद रिजल्ट भी ले चुके हैं।
कई जगह देरी हो सकती है लेकिन विद्यार्थियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। मूल प्रमाण पत्र जमा कराने के लिए विद्यार्थियों को मोहलत दी जा सकती है।