नवजात के साथ परिजन व एंबुलेंस कर्मचारी
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108 एंबुलेंस शुक्रवार को गर्भवती और नवजात के लिए जीवनदायिनी साबित हो गई। ईएमटी ने हिम्मत दिखाकर न केवल महिला की जान बचाई बल्कि, नवजात की उखड़ती सांसों को भी वापस लाने में कामयाब रहे। ईएमटी ने तकरीबन 25 मिनट तक सीपीआर देकर बच्चे की धड़कनें वापस लाईं। इस दौरान दो बार कृत्रिम श्वास दिया गया। आधा लीटर आक्सीजन देकर नवजात को सही सलामत सिविल अस्पताल पांवटा भी पहुंचाया।
मामला शुक्रवार सुबह 5:49 का है। शिलाई के गांव भटनोल से 108 नंबर पर कॉल आई। ईएमटी बस्ती राम और पायलट प्रदीप मौके पर पहुंचे। गर्भवती को शिलाई अस्पताल पहुंचाया। महिला की हालत काफी नाजुक होने के कारण उसे सिविल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। शिलाई अस्पताल में तैनात डॉ. कार्तिक शर्मा ने बताया कि बच्चे की ब्रिच प्रेजेंटेशन है।
गर्भ में बच्चा उल्टा होने के कारण डिलीवरी करवाना जोखिमपूर्ण था। ईएमटी और पायलट ने समय न गंवाते हुए प्रसूता और तिमारदार को लेकर शिलाई से पांवटा के लिए रवाना हो गए। शिलाई से तकरीबन 18 किलोमीटर की दूरी पर एंबुलेंस रोकनी पड़ी। महिला की हालत भी काफी बिगड़ रही थी। बस्तीराम ने किसी तरह डिलीवरी करवाई। बच्चे का शरीर काला पड़ गया था।
बच्चे की धड़कन नहीं थी। इसी बीच बस्तीराम ने बच्चे को सीपीआर (कॉर्डियो पलमनरी रिसेसिटेशन) देने का निर्णय लिया। करीब 25 मिनट तक सीपीआर और कृत्रिम श्वास देकर नवजात की धड़कन लौट आई। फिर ईएमटी ने आधा लीटर आक्सीजन देकर प्रसूता और नवजात को सिविल अस्पताल पांवटा पहुंचाया। उधर, ईएमई मनोज कोठारी ने ईएमटी के प्रयास की सराहना की।