मतदाताओं को जागरूक करने के लिए चुनाव आयोग को भले ही कितने भी पापड़ क्यों न बेलने पड़ें, लेकिन जनजातीय जिले की 107 वर्षीय बुजुर्ग महिला कामु देवी आज की युवा पीढ़ी के लिए मिसाल हैं।
लाहौल घाटी के दुर्गम क्षेत्र तिंदी पंचायत के सलग्रां धार गांव की दादी अम्मा के नाम से विख्यात कामु देवी चुनाव की बात सुनते ही अपने पोतों से पूछने लगी कि दो साल के भीतर दो बार चुनाव हो चुके हैं, अब तीसरी बार कौन सा चुनाव होने जा रहा है।
बेटों और पोतों के बताया कि अब देशभर में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं तो दादी अम्मा झट से तैयार हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भले ही शरीर में ताकत नहीं रही, लेकिन वह अपने चहेते प्रत्याशी के पक्ष में मतदान जरूर करेंगी।
प्रदेश में सात मई को होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर 107 वर्षीय बुजुर्ग बहुत उत्साहित हैं। वे राजनीति में कम, लेकिन वोट डालने में अधिक रुचि रखती हैं।
उन्होंने बताया कि वे अपने छह बेटों और 15 पोतों के साथ लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मतदान करेंगी। हालांकि उन्होंने खुशी जताई कि पहले के जनजातीय क्षेत्र और आज में बहुत बदलाव आ गया है।
लोग अब विकास की बात करते हैं। नेताओं के काम न करने पर उन्हें टका सा जवाब देते हैं। यही कारण हैं कि यहां आज सड़कें, पुल और स्कूल हैं।
उन्होंने बताया कि उनके युवावस्था के दिनों में प्रत्याशी वोट मांगने के लिए सलग्रां जैसे दूरदराज इलाकों में वोट मांगने में नहीं पहुंचते थे, लेकिन आज प्रत्याशी दौड़े-दौड़े मतदाताओं के पास पहुंचते हैं।
उन्होंने खुशी जताई कि जनता की मांग पर यहां चिनाब की धारा पर करोड़ों रुपये का सलग्रां पुल बना है। ये वोट की ही कीमत है।