हिमाचल प्रदेश में 1,82,001 बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र नहीं पहुंच रहे हैं। इन बच्चों ने प्री प्राइमरी स्कूलों में दाखिला ले लिया है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्री-प्राइमरी स्कूलों में जाकर इन बच्चों की पोषण निगरानी करेंगी। राज्य में कुल 2,47,576 बच्चे तीन से छह साल तक की आयु के हैं। 1,82,001 बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों के बजाय प्री प्राइमरी स्कूलों में जा रहे हैं। अब इन सभी बच्चों की पोषण निगरानी हर महीने में पहले और तीसरे शनिवार को होगी। जो बच्चे छूट गए हैं, उन्हें हर दूसरे शनिवार काे केंद्र में बुलाया जाएगा। हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बारे में निर्णय लिया गया है।
राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक रूपाली ठाकुर ने इस संबंध में सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर जानकारी स्पष्ट की है कि प्रदेश में तीन से छह साल के बच्चों की संख्या 2,47,576 है। इनमें से 65,573 बच्चे ही केंद्रों में आ रहे हैं। बाकी 1,82,001 बच्चे प्री प्राइमरी स्कूलों में हाजिरी दे रहे हैं। इन 1,82,001 बच्चों में से 96,494 बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग आंगनबाड़ियों के माध्यम से प्री प्राइमरी स्कूलों में ही की जा रही है। जबकि, 85,507 बच्चों का पूरी तरह से आंगनबाड़ी केंद्रों से संपर्क टूट गया है। असल में तीन से छह साल के सभी बच्चों की यह निगरानी आंगनबाड़ियों के माध्यम से होनी चाहिए।
प्री प्राइमरी स्कूलों के सभी बच्चों की यह निगरानी हर महीने में पहले और तीसरे शनिवार को की जाएगी या फिर यह निगरानी महीने के पहले और तीसरे सप्ताह के पिछले कार्यदिवस में होगी। इसका जिम्मा संबंधित क्षेत्र के आंगनबाड़ी वर्करों को दिया जाएगा। तीन से छह साल के जो बच्चे इस निगरानी से छूट जाएं, उन्हें महीने के दूसरे शनिवार आंगनबाड़ी के स्तर पर मॉनिटर किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जितने भी बच्चे तीन से छह साल के हैं, उन्हें पोषण ट्रैकर पर एनरोल किया जाएगा। इस मामले को उपायुक्तों के ध्यान में लाया जाएगा, जिससे वे संबंधित प्री प्राइमरी स्कूलों के ध्यान में भी इस विषय को जा सकें। यह निर्देश सचिव सामाजिक न्याय, शिक्षा, निदेशक प्रारंभिक, उच्च शिक्षा और उपायुक्त शिमला को भी जारी किए गए हैं।