वर्ष 1990 में अयोध्या में हुए आंदोलन के दौरान सोनीपत से रवाना हुए जत्थे को कड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इस जत्थे में सोनीपत में माधव अनुभवी शाखा सेक्टर-15 के शाखा पालक राम कामरा भी शामिल थे, जिन्होंने उन दिनों के संस्मरण अमर उजाला के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि पुलिस की लाठियां झेलते हुए 19 दिन जेल में बिताने पड़े। उसके बावजूद भी रामलला के दरबार में हाजिरी लगाने का हौसला बुलंद रहा था।
सोनीपत के सेक्टर-15 निवासी राम कामरा ने बताया कि वह पहली बार 27 अक्तूबर 1990 को अयोध्या रवाना हुए थे। ट्रेन सुबह करीब 6 बजे लखनऊ पहुंची। जहां आरएसएस के साथियों ने शृंगार नगर में ठहराया। रात वहीं गुजारी और अगले दिन सुबह पैदल यात्रा निकाली। मुख्य सड़क पहुंचते ही पुलिस ने डंडे बरसाए और गिरफ्तारियां कीं। हमने भी हंसते-हंसते गिरफ्तारी दी। करीब 40 लोगों को 6 बाई 5 की एक रसोई में ठूंस दिया। खटमल वाले कंबल ओढ़ने को दिए। 10 घंटे वहीं बिताए। फिर एफसीआई गोदाम में बनी जेल में डाल दिया। 19 दिन बाद छोड़ा।
छह मार्गों पर वृक्ष काटकर डाल दिए थे
राम कामरा ने बताया वह 4 दिसंबर 1992 को दोबारा अयोध्या गए। जहां हमें हरियाणा के शिविर में ठहराया गया। रात भर डटे रहे। मिलिट्री आने की सूचना पर सभी को वापस जाने को कहा। वापसी में छह मार्गों पर वृक्ष काटकर डाल दिए थे, ताकि सेना समय पर ना पहुंच सके। वापस लौटने पर शिव सेवा समिति ने मॉडल टाउन से शहर में शोभा यात्रा निकाली और श्रीराम नाम का पदक पहनाकर सम्मानित किया था।
टेंट में विराजे राम लला को देख मन हो जाता था दुखी
राम कामरा ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के दौरान दो बार अयोध्या गए थे। जहां एक टेंट में विराजे रामलला को देखकर मन बड़ा दुखी होता था। अब 6 दिसंबर 2023 को शादी की 50वीं सालगिरह भी अयोध्या पहुंचकर परिवार के साथ मनाई।