22 जनवरी को अयोध्या में श्री रामलला मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा के दिन तीन राज्यों के कई जिले झज्जर के दीयों से जगमग होंगे। हरियाणा के अलावा महाराष्ट्र और राजस्थान के अधिकतर जिलों में झज्जर में बने दीये से 22 जनवरी को लोग अपने घरों के बाहर रोशनी करेंगे। इसके लिए कई ऑर्डर मिल चुके हैं और दीये बनाने का काम जारी है।
राजस्थान, महाराष्ट्र के कई जिलों में भेजे जा रहे हैं दीये, 20 जनवरी तक होनी है सप्लाई
रहणिया मोहल्ले में रहने वाले कुम्हार परिवारों के कई सदस्य पिछले कई दिनों से 22 जनवरी के लिए दीये बनाने का काम कर रहे हैं। इन परिवारों को महाराष्ट्र और राजस्थान के लिए 10 लाख दीयों का ऑर्डर मिला है। राजस्थान में यह दीये चिड़ावा, सिंघाना, खेतड़ी और जयपुर के आसपास के इलाकों में भेजे जाएंगे। इसके अलावा हरियाणा के झज्जर सहित चरखी दादरी, भिवानी, रोहतक, पानीपत, गुरुग्राम से भी दीयों की डिमांड आई है।
इनमें प्रत्येक जिले में 30 से 50 हजार दीयों की सप्लाई होनी है। यहां के कारीगरों के पास अभी तक 11 लाख से अधिक दीयों का ऑर्डर आ चुका है। इन सभी जगह पर 20 जनवरी तक दीयों की सप्लाई कर दी जाएगी ताकि 22 जनवरी को जब अयोध्या में श्री रामलला की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा हो तो हर घर में दीये जगमगा उठे।
सूरत से आया ऑर्डर, लेकिन समय कम
मिट्टी से अलग-अलग सामान तैयार करने वाले कारीगर जितेंद्र का कहना है कि व्यवसाय से जुडे़ सभी 90 परिवारों का पुश्तैनी काम है। गुजरात के सूरत से भी लगभग 5 लाख दीयों का ऑर्डर परिवारों के पास आया है, लेकिन इतनी संख्या में दीये बनाना मुमकिन नहीं है, इसलिए फिलहाल गुजरात में दीये भेजे जाने पर संशय है।
इसलिए है झज्जर के दीयों की मांग
झज्जर के दीये काली और पीली मिट्टी से बनाए जाते हैं। यह मिट्टी जोहड़, खेत के आसपास से ली जाती है। पासौर और लाडपुर गांवों से मिट्टी लाकर दीये तैयार किए जाते हैं। कारीगर जितेंद्र का कहना है कि महाराष्ट्र में भी दीये बनते हैं, लेकिन वहां की मिट्टी रेतीली होती है, इसलिए दीये में तेल डालते ही उसमें रिसाव शुरू हो जाता है जबकि यहां बने दीये में ऐसा नहीं होता है, इसलिए यहां के दीये पसंद किए जाते हैं।