चेंबर ऑफ इंड्रस्टी के तत्कालीन सचिव एसके अग्रवाल बताते हैं, बात वर्ष 1990 की है। अयोध्या में कारसेवा की घोषणा से पहले ही पूरा पूर्वांचल जय श्रीराम के उदघोष से गूंज रहा था। भाजपा नेता रमापति राम त्रिपाठी और शिव प्रताप शुक्ल की अगुवाई में गांव- मोहल्ले से कारसेवक निकलने लगे थे।
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उधर, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी रथ यात्रा लेकर निकल पड़े थे। आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने जगह-जगह घेराबंदी शुरू कर दी। अघोषित कर्फ्यू के चलते अनाज का संकट होने लगा। ऐसे में जो कारसेवक टुकड़ी-टुकड़ी में अयोध्या जा रहे तो थे, उनके रुकने व भोजन का प्रबंध ने बड़ी चुनौती थी।
आंदोलनकारियों का केंद्र गोरखनाथ मंदिर हुआ करता था। महंत अवेद्यनाथ के आह्वान पर व्यापार मंडल के नेता न दयाशंकर दुबे, चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के चंद्रप्रकाश अग्रवाल, व्यापारी नेता विष्णु अजीत सरिया, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी कृष्ण कुमार तुलस्यान और विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष बाल कृष्ण सर्राफ ने आंदोलन में सक्रिय योगदान शुरू कर दिया।