जरा सोचिए कि अयोध्या में जो भव्य राम मंदिर एक हजार वर्ष से ज्यादा समय तक टिका रहने वाला है, वह आपके और हमारे जीवन काल में बना है। अभी राम मंदिर यह ध्यान में रख कर बनाया गया है कि वह एक हजार वर्ष तक सुरक्षित खड़ा रहे। लेकिन भारत की अखंड आस्था के प्रतीक राम मंदिर का प्रबलीकरण समय-समय पर किया जाता रहेगा, इसे ध्यान में रखें, तो अयोध्या का राम मंदिर कितने समय तक आस्था का अमरत्व भरा संदेश विश्व को देता रहेगा, इसका अनुमान अभी लगाना संभव नहीं होगा।
पत्थरों की आयु भी हवा, धूप, पानी से प्रभावित न हो, इन सब बातों का ध्यान विशेषज्ञों की टीम ने रखा है। राम मंदिर का निर्माण लार्सन एंड टूब्रो कंपनी ने किया है। कंपनी ने मंदिर निर्माण की देखरेख के लिए देश के योग्यतम लोगों को अपने साथ जोड़ा। रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान और चेन्नई स्थित आईआईटी मिल कर इस पर काम किया। धरती से लगभग 200 फीट नीचे की मिट्टी के सैंपल की जांच चेन्नई आईआईटी ने की। भूकंप का नींव पर कितना असर होगा, यह परीक्षण भी किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार 500 साल में एक सेंटीमीटर से ज्यादा मिट्टी नहीं धंसनी चाहिए।
श्री रामजन्म भूमि न्यास के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष चंपत राय के अनुसार मंदिर ढाई से तीन एकड़ क्षेत्र में बना है। जमीन के नीचे 1200 शक्तिशाली खंबों का निर्माण किया गया। एक गड्ढे का व्यास कम से कम एक मीटर है। गहराई 40 मीटर तक रखी गई है। गड्ढों में विशुद्ध कंक्रीट भरी गई है।
मंदिर निर्माण के दौरान अयोध्या आने वाले राम भक्त मंदिर निर्माण होते देख सकें, ऐसी व्यवस्था भी की गई। छह दिसंबर, 1992 के बाद लगभग 1200 फीट की ऊंचाई को समतल किया गया था। जमीन को समतल करने में ही कसौटी पत्थर के 60 खंबे, लगभग 41 इंच के घेरे वाला 11 फीट का अखंड शिवलिंग और कुछ ऐसे खंबे मिले, जिन पर गणपति, यक्ष-यक्षिणी की उत्कृष्ट मूर्तियां उत्कीर्ण की गई हैं। मंदिर के लिए होने वाली खुदाई में जो भी सामान मिला, उसकी कार्बन डेटिंग करा कर संग्रहालय बना कर उन्हें संरक्षित गया है। ज़मीन को समतल करते समय 12 टन के पत्थर भी मिले, जिन्हें उठाने के लिए विशेष क्रेन बुलानी पड़ी थीं।
मंदिर का निर्माण करा रहे ट्रस्ट ने राम भक्तों से अनुरोध किया कि वे धन की सेवा के अलावा तांबे की पत्तियां और रॉड दान करें। मंदिर निर्माण में एक ग्राम भी लोहा प्रयोग नहीं किया गया। धातुओं में तांबा सबसे टिकाऊ और लंबे समय (लगभग एक हजार साल तक) सुरक्षित रहता है। पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की 18 इंच लंबी, 30 मिलीमीटर मोटी और 30 मिलीमीटर चौड़ी 10 हज़ार पत्तियों का प्रयोग किया गया। समाज ने सामूहिक रूप से अपना, अपनी संस्थाओं या अपने गांव, शहर, मोहल्ले का नाम लिखवा कर तांबे की पत्तियां बनवा कर दान कीं इसके अलावा तांबे की दो इंच की 10 हजार से अधिक रॉड भी दान में मिलीं।
भव्य राम मंदिर के निर्माण के अतिरिक्त अय़ोध्या नगरी में अति विकसित हवाई अड़डा, हैलीपैड, आधुनिक और बड़ा रेलेवे स्टेशन, सौ बसें पार्क किए जाने वाला बस अड्डा बनाया गया है। अयोध्या अति विकसित धर्म नगरी के तौर पर दोबारा दिव्यता को प्राप्त कर रही है। अयोध्या में अध्यात्म की लौ अब कभी नहीं बुझेगी, राम भक्त यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं उठा रखेंगे।