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Ayodhya: मेरी सीता की अयोध्या की ओर किसी ने आंख उठाकर भी देखा तो... भक्ति के साथ सतर्क हैं निगाहें

Fri, 19 Jan 2024 06:46 PM IST
Vikas Kumar विक्रांत चतुर्वेदी, अमर उजाला, अयोध्या

सार

अयोध्या में राम मंदिर की सुरक्षा में तैनात आरएएफ की महिला कांस्टेबल अपने बुलंद हौंसलों के साथ इस भीषण ठंड में भी बिना किसी परेशानी के अपना फर्ज निभा रही हैं। अमर उजाला ने इनसे इनके अनुभव पूछे...
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सुरक्षा में तैनात महिला आरएएफ कर्मी - फोटो : अमर उजाला
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नारी की प्रेरणा है मां सीता

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नारी की शक्ति है मां सीता
नारी की भक्ति है मां सीता
हर घर हर नारी में है मां सीता।


हे मां सीता! आज मैं आपकी ससुराल में हूं। अयोध्या में जो हो रहा है उसे महसूस कर रहा हूं, यहां की हवाओं में। कुछ अंगुलियों में गलन है और मन में बेचैनी। बीच-बीच में हृदय धड़क पड़ता है और मन सोचता है, सच में मैं इस पल का साक्षी हूं। फेफड़े एक बार बहुत जोर से हवा को अंदर खीचकर रोके रखना चाहते हैं, जैसे ये अभी भगवान राम के चरणों को छूकर आईं हों। ऐसे में मेरी मुलाकात हनुमानगढ़ी के पास कुछ ऐसी महिलाओं से हुई, जिनसे मिलने के बाद एक बार फिर महिला शक्ति और मां सीता की सहनशक्ति का एहसास हुआ।

यहां तैनात आरएएफ की महिला कमांडों के हाथों में हथियार देखकर एक बार फिर से मुड़कर देखना पड़ता है। उनके तेवर को नमन करने का मन करता है। आज ब्रेबो कंपनी (B-91/RAF) की नारी शक्ति से बात हुई। डिप्टी कमांडेंट अरूण कुमार तिवारी के नेतृत्व में वो पूरे जोश के साथ खड़ी थीं और उसके साथ सहायक कमांडेंट सरोज कुमार भी पूरी दृणता के साथ नजर आ रही थीं। 

कांस्टेवल चित्रा बैस - फोटो : अमर उजाला
उनसे अनुमति के बाद मैंने इन नारी शक्ति से बात करने का प्रयास किया। मेरी पहली बात कांस्टेवल चित्रा बैस के साथ होती है। उनकी आखों में एक चमक है, मैं उनका नाम पूछता हूं और उसके साथ ही यह भी कि आपको यहां सुरक्षा में तैनात होकर कैसा लग रहा है। वह तुरंत कहती हैं, अच्छा लग रहा है। यह हमारा काम है और भगवान राम और सीता के इस काम को हम कर रहे हैं, इसको लेकर हमारे अंदर बहुत उत्साह है। राम और सीता मैया की इस धरती की तरफ कोई आंख उठाकर तो देखे।   

हवलदार सोनी (बाएं) और इंस्पेक्टर तारावती (दाएं) - फोटो : अमर उजाला
फिर मेरी मुलाकात हवलदार सोनी से होती है। वह हिंदी बोलने में थोड़ा असहज महसूस करती हैं तो फिर साथी इंस्पेक्टर तारावती उनके कहे शब्दों को अपनी आवाज देती हैं। वह कहती हैं, बहुत अच्छा लग रहा है। हम अपने सर के नेतृत्व में बहुत ही अच्छा महसूस कर रहे हैं। ऐसी जगह पर सुरक्षा देना किसे अच्छा नहीं लगेगा। हम चाहते हैं यह शुभ काम बहुत ही शानदार तरीके से हो जाए। 
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अंत में मेरी मुलाकात इंस्पेक्टर तारावती से होती है। उनका उत्साह देखते ही बन रहा है, पहला वाक्य जो उनके मुंह से निकला वो था, ये हमारा सौभाग्य है। ये बहुत बड़ी बात है। एक शानदार अनुभव को मैं कभी नहीं भूलूंगी।
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