यहां तैनात आरएएफ की महिला कमांडों के हाथों में हथियार देखकर एक बार फिर से मुड़कर देखना पड़ता है। उनके तेवर को नमन करने का मन करता है। आज ब्रेबो कंपनी (B-91/RAF) की नारी शक्ति से बात हुई। डिप्टी कमांडेंट अरूण कुमार तिवारी के नेतृत्व में वो पूरे जोश के साथ खड़ी थीं और उसके साथ सहायक कमांडेंट सरोज कुमार भी पूरी दृणता के साथ नजर आ रही थीं।
उनसे अनुमति के बाद मैंने इन नारी शक्ति से बात करने का प्रयास किया। मेरी पहली बात कांस्टेवल चित्रा बैस के साथ होती है। उनकी आखों में एक चमक है, मैं उनका नाम पूछता हूं और उसके साथ ही यह भी कि आपको यहां सुरक्षा में तैनात होकर कैसा लग रहा है। वह तुरंत कहती हैं, अच्छा लग रहा है। यह हमारा काम है और भगवान राम और सीता के इस काम को हम कर रहे हैं, इसको लेकर हमारे अंदर बहुत उत्साह है। राम और सीता मैया की इस धरती की तरफ कोई आंख उठाकर तो देखे।
हवलदार सोनी (बाएं) और इंस्पेक्टर तारावती (दाएं)
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फिर मेरी मुलाकात हवलदार सोनी से होती है। वह हिंदी बोलने में थोड़ा असहज महसूस करती हैं तो फिर साथी इंस्पेक्टर तारावती उनके कहे शब्दों को अपनी आवाज देती हैं। वह कहती हैं, बहुत अच्छा लग रहा है। हम अपने सर के नेतृत्व में बहुत ही अच्छा महसूस कर रहे हैं। ऐसी जगह पर सुरक्षा देना किसे अच्छा नहीं लगेगा। हम चाहते हैं यह शुभ काम बहुत ही शानदार तरीके से हो जाए।
अंत में मेरी मुलाकात इंस्पेक्टर तारावती से होती है। उनका उत्साह देखते ही बन रहा है, पहला वाक्य जो उनके मुंह से निकला वो था, ये हमारा सौभाग्य है। ये बहुत बड़ी बात है। एक शानदार अनुभव को मैं कभी नहीं भूलूंगी।