2018 में कांग्रेस का प्रयोग फेल, आपस में टकराए सत्ता के दो बड़े केंद्र
कांग्रेस की बात करें तो 1952 में पार्टी ने पहली बार टीकाराम पालीवाल को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद 19 मई 2002 में कांग्रेस ने बनवारी लाल बैरवा को उपमुख्यमंत्री बनाया। वहीं, 12 जनवरी 2003 को कमला बेनीवाल डिप्टी सीएम बनाईं गईं थीं। इस दौरान राजस्थान में दो डिप्टी सीएम थे। 2003 के चुनाव में भाजपा की सरकार बनी। 2008 में कांग्रेस ने एक फिर सत्ता में वापसी की, लेकिन डिप्टी सीएम का पद किसी को नहीं दिया गया। इसके ठीक दस साल बाद राजस्थान कांग्रेस में सत्ता के दो बड़े दावेदार हो गए थे। एक अशोक गहलोत और दूसरे सचिन पायलट। मुख्यमंत्री सिर्फ एक को ही बनाया जा सकता था, ऐसे में गहलोत ने एक बार फिर बाजी मार गए। उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया और सचिन पायलट को डिप्टी सीएम का पद दिया गया। लेकिन, अपने बगावती तेवर के कारण पायलट सिर्फ जुलाई 2020 तक ही इस पद पर रह सके।
मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम बनाकर भाजपा ने साधे समीकरण
राजस्थान में भाजपा ने सामान्य वर्ग से आने वाले शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर अपने कोर वोट को साधने का काम किया है। वहीं, दिया कुमारी को डिप्टी सीएम का पद देकर आधी आबादी यानी महिला वोट बैंक को मजबूत किया किया, जबकि प्रेमचंद बैरवा को उपमुख्यमंत्री घोषित कर दलित वर्ग को भी अपने साथ जोड़ा है।