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Udaipur News: जेल की हवा खाने की होड़ मची, कैदियों द्वारा निर्मित कूलर बने शहरवासियों की पहली पसंद

Sat, 08 Jun 2024 01:49 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

कौन है जो जेल की हवा खाना पसंद करेगा लेकिन इन दिनों शहरवासियों में इसकी होड़ मची हुई है। इसके पीछे कारण है कि जेल वर्कशॉप में बन रहे कूलर्स इस भीषण गर्मी में उदयपुर वासियों की पहली पसंद बने हुए हैं। ज्यादातर लोग इन कूलरों की हवा खाने के लिए इसे खरीद रहे हैं।
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जेल की हवा खाने की होड़ मची - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उदयपुर जेल में कैदियों द्वारा बनाए जा रहे कूलर्स की क्वालिटी ने बाजार के कूलरों को पीछे छोड़ दिया है। जेल वर्कशॉप में बन रहे इन कूलर्स की हवा खाने के लिए लोगों के बीच होड़ मची हुई है। उदयपुर की सेंट्रल जेल में कैदियों के दक्ष हाथों से निर्मित डेजर्ट कूलर्स की क्वालिटी ने बाजार में निर्मित कूलरों को पीछे छोड़ दिया है। जेल के वर्कशॉप में बन रहे कूलर्स की बॉडी 22 एमएम शीट की है। शीट मोल्डिंग और वेल्डिंग भी उत्तम क्वालिटी की है, जो एक बार खरीदने के बाद कई सालों तक टिकाऊ रहती है। 

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दूसरी बड़ी बात यह है कि जेल में निर्मित इन कूलरों की वाटर टैंक क्षमता 90 लीटर है, जबकि बाजार में बिक रहे आयरन बॉडी या फाइबर बॉडी कूलर्स की टैंक क्षमता 45 लीटर से 60 लीटर तक है। जिसके कारण कूलरों में पानी बार-बार भरना पड़ता है, जबकि जेल में निर्मित कूलर का एक बार वाटर टैंक भरने पर 12 घंटे तक लगातार चलता है।

जेल अधीक्षक राजवीर सिंह ने बताया कि गर्मी शुरू होने से पहले 500 कूलर बनाने का लक्ष्य था लेकिन मांग बढ़ने के कारण 600 कूलर बनाए जा चुके हैं। कई एनजीओ, व्यापारिक संस्थान, इंस्टीट्यूट्स की डिमांड अभी भी आ रही है। अपनी तमाम खूबियों के कारण उदयपुर सेंट्रल जेल में निर्मित डेजर्ट कूलर न केवल उदयपुर बल्कि मेवाड़ में सुर्खियां बटोर रहा है। 
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जेल अधीक्षक राजवीर सिंह कहते हैं कि हमारे कैदी दरी, जाजम, कारपेट बनाने का काम भी बखूबी करते हैं। हमारा लक्ष्य राजस्व कमाना नहीं बल्कि इन वस्तुओं के निर्माण से मिलने वाला मुनाफा कैदियों को रिहाई के दौरान दिया जाता है। साथ ही कूलर, दरी, गलीचे बनाने वाले हाथ जेल से रिहा होने के बाद हथियार न उठाएं, इसके पीछे यही मकसद रहता है।

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