लोकसभा चुनाव के दौर में उदयपुर जिले से अलग हुए सलूंबर जिले के गातोड़ गांव में वोट मांगने जाने वाले नेताओं को इसी गांव में भूख से बिलबिला रहे एक घर के तीन बच्चों का दर्द दिखाई नहीं दिया। गांव वासी गणगौर और ईद मना रहे हैं। जबकि सात दिन पहले गुजरे भैरा मीणा के घर खाने को रोटी नहीं है।
लोकसभा चुनाव का सर्वे करने गए अमर उजाला के रिपोर्टर को गातोड़ गांव में पता चला कि इस गांव का भैरा मीणा चार अप्रैल को कुपोषण से उत्पन्न बीमारी से चल बसा था। भैरा की पत्नी की भी पूर्व में मौत हो चुकी है। हालांकि, भैरा का 90 वर्षीय पिता गोता मीणा जिंदा है। मगर शरीर में जान न बचने से खाट पर पड़ा लंबी सांसें ले रहा है। बुजुर्ग गोता मीणा भी पत्नी विहीन है।
परिवार जनों की लगातार हो रही क्षति का कहर दिवंगत भैरा के बच्चों पायल, विक्रम और राजू पर टूट पड़ा है। बच्चों के पास न खाने को दाना न फूटी कौड़ी है। तीनों बच्चे हाल ही में गुजरे पिता भैरा की तस्वीर के पास बैठे किस्मत को कोस रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि गारंटी की खैरात बांटने वाली सरकार को सात दिन से भूखे इन बच्चों के पेट दिखाई नहीं दिए। कांग्रेस प्रत्याशी भी छह महीने पूर्व इस क्षेत्र के कलेक्टर रह चुके हैं। उनके कानों में भी भूख से बेहाल बच्चों की पुकार नहीं पहुंची।
कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर बच्चों के घर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी भी आए आगे
सलूंबर में जयसमंद समीपवर्ती गातोड़ गांव में माता-पिता की मौत के बाद बेबस जिंदगी जी रहे तीन मासूम बच्चों की बात सुनकर जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर सराड़ा तहसीलदार आस्था बामणिया, जयसमंद बीडीओ दयाचंद यादव, सरपंच हमीरलाल मीणा, सचिव गजेन्द्र प्रजापत और पटवारी प्रिया प्रजापत सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी जुटाई। वहीं, तीनों मासूम बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र जारी करने, आधार कार्ड बनवाने और आंगनबाड़ी व स्कूल में शिक्षा से जोड़ने व पालनहार योजना का लाभ दिलवाने की प्रकिया शुरू की।
मासूम बच्चों की पीड़ा और स्थिति को लेकर समाजसेवी रमेश रामानी उदयपुर, प्रेम पटेल कुराड़िया और खेमराज व शंकरलाल पटेल ने आटा, तेल, दाल और बिस्किट सहित करीब दो महीने की राशन सामग्री उपलब्ध कराई। इस दौरान मोहित पंचाल, पूर्व नवयुवक मंडल अध्यक्ष जयंतीलाल तेली और प्रकाश चौधरी सहित कई युवा मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि माता-पिता की बीमारी से हुई मौत के बाद तीनों मासूम बच्चे बेबस की जिंदगी जी रहे थे। वहीं, इनके 90 वर्षीय दादा की जिंदगी खाट में होने से मासूम बच्चे बेसहारा हो गए थे। सलूंबर जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने बताया कि बच्चों को सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा।