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Rajasthan: शहीद मेजर मुस्तफा को मिलेगा शौर्य चक्र सम्मान, अपनी जान की परवाह न करते हुए बचाई थी कई जिंदगियां

Thu, 17 Aug 2023 02:45 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

77वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश में मां भारती के उन वीर सपूतों को भी याद किया गया, जिन्होंने सरहद पर भारत माता की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। राजस्थान के उदयपुर में रहने वाले एक ऐसे ही वीर सपूत मेजर मुस्तफा को मरणोपरांत शौर्य चक्र देने की घोषणा की गई है।
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शहीद मेजर मुस्तफा और उनका परिवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उदयपुर के एक छोटे से गांव खेरोदा के रहने वाले मेजर मुस्तफा जिनके अदम शौर्य और पराक्रम के कारण उन्हें शौर्य चक्र दिया जाएगा। इस अवसर उनकी मां फातिमा बोहरा और उनकी बहन डॉ अलिफिया ने मेजर की इस उपलब्धि पर फक्र जताया है।

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मेजर मुस्तफा की मां ने कहा कि मुस्तफा जितना देश पर गर्व करता था, उतना ही अपने धर्म को भी मानता था। अपनी ट्रेनिंग के दौरान नमाज पढ़ना और रमजान में रोजा इफ्तारी के बाद ही वह पानी नहीं पीता था। इस दौरान ट्रेनिंग में 10 से 15 किलोमीटर दौड़ने के बाद जब वह बेहोश भी हो जाता था, तब भी अपने अधिकारियों को बेहोशी के दौरान उसे पानी पिलाने से मना कर देता था। क्योंकि रोजे के दौरान पानी नहीं पिया जाता है। 

उन्होंने बताया कि रोजा इफ्तारी के दौरान ही उनकी ट्रेनिंग चलती थी। जो महीने भर के लिए होती थी, जिसमें रोज 15 किलोमीटर दौड़ना होता था। मेजर मुस्तफा की मां ने कहा कि मेरा बेटा बचपन से ही बड़े ही संस्कारों के साथ घर परिवार के आदेशों का पालन करता था।
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बहन बोली वह मेरा हीरो था
मेजर मुस्तफा की बहन डॉक्टर अलिफिया ने कहा कि वह बचपन से ही मेरा हीरो था। स्कूल में जब मेरा दाखिला हुआ, तब वह मेरी क्लास में बैठा करता था, जिससे मुझे अकेलेपन का एहसास न हो। उन्होंने कहा कि वह मेरा भाई नहीं, बल्कि मेरे मां-बाप से भी बढ़कर था। जो मेरे हर सुख-दुख में मेरे कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता था। मेजर मुस्तफा की बहन ने बताया कि उसे अवार्ड लेने का बड़ा शौक था, जिसके लिए वह कड़ी मेहनत और परिश्रम भी करता था। उन्होंने कहा कि मुझे फक्र है कि मेरे भाई के शहीद होने के बाद भी उसे अवार्ड के रूप में शौर्य चक्र से नवाजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह मेरा पहला गुरु था, जब आज भी कोई दुविधा आती है तो मैं अपने भाई को ही याद करती हूं।



मां ने कहा मेरे बेटे पर मुझे फक्र है
मेजर मुस्तफा की मां ने कहा कि हमारे बेटे ने न सिर्फ हमारे परिवार की बल्कि देश का नाम भी गौरवान्वित करने का काम किया है। हमें राष्ट्रपति भवन से उनके मरणोपरांत शौर्य चक्र दिए जाने का सूचना मिली है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। हमारे बेटे ने अपने आप को साबित करके दिखाया है कि वह बचपन से ही मां भारती की रक्षा और देश के लिए कुछ करना चाहता था। इस दौरान मेजर मुस्तफा की मां ने अपने दिल के टुकड़े को याद करते हुए कहा कि जिस दिन यह घटना घटित हुई, उस दिन हम उसकी (मुस्तफा) शादी की तैयारी में जुटे हुए थे। अंतिम बार मेरे बेटे से शादी के मुद्दे को लेकर ही बातचीत हुई थी। 

उसकी तैयारी को लेकर दो दिन पहले ही मैंने छुट्टी लेने को कहा था। लेकिन दो दिन बाद ही एक ऐसी खबर आई, जिसने हमारे कलेजे के टुकड़े को हमसे छीन लिया। मेजर मुस्तफा की मां ने बहुत भारी मन से कहा कि अब हर लम्हा बेटे की यादों में जीते हैं। लेकिन मुझे फक्र है कि मैं मेजर मुस्तफा की मां हूं। मां ने कहा कि हम बोहरा कम्युनिटी से हैं। हमारे समाज के लोग व्यवसाय से जुड़े हुए रहते हैं। लेकिन मुस्तफा ने मां भारती की रक्षा करने के लिए सरहद को चुना। ऐसे में हमारे समुदाय से एनडीए में जाने वाले मेजर मुस्तफा पहले व्यक्ति थे। इस पर हमें भी गर्व है कि उसने हमारी कम्युनिटी का नाम भी ऊंचा करने का काम किया। इसमें हमारे समाज और धर्म गुरुओं का भी पूरा सहयोग रहा।

यह थी घटना
मेजर मुस्तफा की मां ने कहा कि 22 अक्टूबर 2022 अरुणाचल प्रदेश में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हुए थे। उस दिन मेजर मुस्तफा और उनकी यूनिट को एक मिशन पूरा करना था। ऐसे में उन्होंने हेलीकॉप्टर रुद्रा से अपने पांच साथियों के साथ उड़ान भरी थी। वह अपना मिशन कंप्लीट करके वापस लौट रहे थे, तभी हेलीकॉप्टर के हेक्टर में आग लग गई थी। जब उन्हें आग लगने की सूचना मिली थी, तब हेलीकॉप्टर को नीचे उतार सकते थे। तभी पता चला कि जहां उनका हेलीकॉप्टर है वह मेकिंग नाम के कस्बे के ऊपर है। जहां बड़ी संख्या में आबादी के साथ इंडियन आर्मी का एक बड़ा बेस भी था।
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ऐसे में आग लगी हुई हेलीकॉप्टर को अगर नीचे उतारा जाता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। इसलिए उन्होंने वहां हेलीकॉप्टर नहीं उतरा। शायद उन्हें पता नहीं था कि इसके अलावा हेलीकॉप्टर उतरने की कोई जगह ही नहीं है। आसपास 100 मीटर की जगह पर ही बड़ी संख्या में पेड़ पौधे थे। ऐसे में हेलीकॉप्टर आबादी की तरफ न ले जाकर जंगल की तरफ मोड़ दिया, जहां उनका हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया।

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