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Udaipur News: ईडाणा माता का अनोखा रहस्य, जहां खुद प्रकट होती है आग और माता करती है अग्नि स्नान

Thu, 19 Mar 2026 06:30 AM IST
उदयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

उदयपुर के ईडाणा माता मंदिर में एक ऐसी अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जहां माता के अग्नि स्नान का रहस्य आज भी लोगों के लिए आस्था और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। नवरात्रि के दौरान यह अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं को दूर-दूर से यहां खींच लाता है।
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यहां ईडाणा माता करती हैं अद्भुत अग्नि स्नान - फोटो : अमर उजाला
उदयपुर जिले में स्थित ईडाणा माता मंदिर अपनी अनोखी और रहस्यमयी परंपरा के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां माता स्वयं अग्नि स्नान करती हैं। इस विहंगम दृश्य को देखकर हर कोई माता के आगे अपना सिर झुका लेता है और सुख-समृद्धि की कामना करता है। नवरात्रि के समय माता का यह अद्भुत अग्नि स्नान लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है।

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां मंदिर परिसर में अचानक आग लग जाती है और कुछ समय बाद अपने आप शांत भी हो जाती है। हैरानी की बात यह है कि आग की लपटें इतनी तेज होती हैं कि उन्हें कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है।
 
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आग लगते ही उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
आग लगते ही उमड़ पड़ते हैं भक्त
जब भी मंदिर में यह अग्नि प्रकट होती है, आसपास के गांवों और दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं। पूरे मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है और भक्त माता के जयकारे लगाते हैं। स्थानीय मान्यता है कि जब माता प्रसन्न होती हैं, तब ही अग्नि स्नान करती हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह आग कैसे लगती है और इसका कोई निश्चित समय भी तय नहीं है।

आग से पहले उतार लिए जाते हैं आभूषण
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि जैसे ही आग की हल्की लपटें दिखाई देती हैं, पुजारी तुरंत माता के आभूषण और शृंगार उतार लेते हैं। जब आग शांत हो जाती है, तब फिर से माता का शृंगार किया जाता है।
 
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नवरात्रि में माता करती हैं अग्नि स्नान - फोटो : अमर उजाला
प्रसाद घर नहीं ले जाते भक्त
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की एक और खास मान्यता है। यहां चढ़ाया गया प्रसाद घर नहीं ले जाया जाता, बल्कि मंदिर परिसर में ही बांट दिया जाता है।

कई रोगों से मुक्ति की मान्यता
स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से लकवा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी राहत मिलती है। इसी आस्था के कारण नवरात्रि और विशेष अवसरों पर यहां हजारों भक्त पहुंचते हैं।
 
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रहस्यमयी है ईडाणा माता का अग्नि स्नान - फोटो : अमर उजाला
अगरबत्ती नहीं चढ़ाई जाती
मंदिर के कर्मचारियों के अनुसार यहां माता की प्रतिमा के सामने अगरबत्ती नहीं जलाई जाती, ताकि किसी को यह भ्रम न हो कि अगरबत्ती की चिंगारी से आग लगी होगी। मंदिर में एक अखंड ज्योत जरूर जलती है लेकिन उसे कांच के अंदर सुरक्षित रखा जाता है।

पांडवों और राजा जयसिंह से जुड़ी मान्यता
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार पांडवों ने भी अपने वनवास के दौरान यहां आकर माता की पूजा की थी। वहीं एशिया की प्रसिद्ध जयसमंद झील के निर्माण के समय मेवाड़ के शासक महाराणा जयसिंह भी यहां आकर देवी शक्ति की आराधना कर चुके हैं।

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं। ऐसे में नवरात्रि के दौरान ईडाणा माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। भक्तों को उम्मीद रहती है कि इस पावन समय में माता के अग्नि स्नान के दर्शन भी हो सकते हैं। इसी रहस्यमयी परंपरा और अटूट आस्था के कारण ईडाणा माता मंदिर आज भी भक्तों के लिए गहरी श्रद्धा और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।
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