बीबीसी की गुजरात दंगों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को देखने के बाद अजमेर सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के दस छात्रों को प्रशासन ने 14 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया है। वहीं, विश्वविद्यालय ने कैंपस ने डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर बैन लगा दिया है।
गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' पर लगातार देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। देश की कई यूनिवर्सिटी में डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग को लेकर माहौल गरमाया हुआ है जहां पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इसकी स्क्रीनिंग की गई, फिर जेएनयू और जामिया में स्क्रीनिंग को लेकर बवाल हुआ। अब राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बांदरसिंदरी थाना क्षेत्र के राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूराज) में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को लेकर छात्रों के निलंबन का मामला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के कैंपस में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की शाम कुछ छात्रों के डॉक्यूमेंट्री देखने के कथित तौर पर प्रशासन की ओर से 10 छात्रों को 14 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि छात्रों का कहना है कि उन्होंने डॉक्यूमेंट्री मोबाइल पर ही देखी थी।
भ्रमपूर्ण स्थिति बनाने की हो रही कोशिश
वर्तमान में भारत, जी-20 की अध्यक्षता की महत्त्वपूर्ण भूमिका में है। विभिन्न क्षेत्रों में आधारभूत परिवर्तनों से जनाकांक्षाओं को मूर्त रूप मिल रहा है। इस तरह की स्थिति में, हाल ही में आई पक्षपातपूर्ण, भारत के शीर्ष नेतृत्व पर आधारहीन आक्षेपों से युक्त बीबीसी डाक्यूमेंट्री औपनिवेशिक पिछलग्गूपने तथा आधारहीन झूठे पुलिंदों का प्रतीक मात्र है। अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री हुश्यार सिंह मीना ने कहा कि, "गुजरात दंगों पर सब कुछ भारतीय न्याय व्यवस्था द्वारा साफ कर दिए जाने के बावजूद विदेशी ताकतों द्वारा भ्रमपूर्ण स्थिति बनाने तथा विदेशी मीडिया ट्रायल की कोशिशें बंद होनी चाहिए।