फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजे के राज में बच्चे नहीं पढ़ सकेंगे उर्दू

Thu, 05 Nov 2015 05:22 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने स्कूली शिक्षा में बदलाव के अंतर्गत सरकारी किताबों से उर्दू कविताओं और लघु कहानियों को हटाने का फैसला किया है।
विज्ञापन


सरकार ने मशहूर लेखकों इसमत चुगताई और सफदर हाशमी की उन लघु कहानियों और कविताओं को किताबों से हटाने का निर्णय लिया है जो मुख्य रुप से उर्दू और मुस्लिम पात्रों के आस पास घूम रही हैं।

सूत्रों की माने तो जो कहानियां किताबों से हटाई जा रही है उनमें एक दिन की बादशाहत और अजमेर की सैर शामिल है जिन्हें कक्षा 5 में पढ़ाया जाता है।

पाठ्यक्रम में हो रहा है सुधार!

वहीं हलीम चला चांद पर और सूत का रेशम और चांद के खातिर जो क्रमशः कक्षा 4 और 3 में पढ़ाए जाते हैं उन्हें भी किताबों से हटाया जा रहा है। ये वो कहानियां हैं जिनके पात्र मुस्लिमों के आस पास घूमते हैं।

बताते चलें कि राजे सरकार बीते 24 अगस्त से ही पाठ्यक्रम सुधार का कार्यक्रम शुरु किया है। जिसके अतंर्गत सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिले।

जो उर्दू की कहानियां और कविताएं किताबों से हटाई जा रही हैं उन्हें हटाने का निर्णय राज्य की पाठ्यक्रम निर्धारण कमेटी ने किया है। यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि दो महीनों के भीतर कक्षा 1 से लेकर 8 तक के पाठ्यक्रम बदले जा चुके हैं।
विज्ञापन

ये है वजह

पाठ्यक्रम में हो रहे इस बदलाव पर कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि 'जिन अध्यायों और कविताओं का हटाने का फैसला लिया गया है उनमें उर्दू के शब्द ज्यादा थे जिसे समझने में छात्रों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। वहीं कविताएं और कहानियां समुदाय विशेष के रीति रिवाजों पर आधारित थी, जो हमारी नियमावली के मुताबिक नहीं है।'

वहीं जो अध्याय, कविताएं और कहानियां हटाई गई हैं उनके स्थान पर सिंधी समुदाय के महान संतो जैसे ताऊराम और कवर राम के साथ-साथ एक अध्याय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हेमु कलानी  पर रखने के लिए कमेटी की ओर ड्राफ्ट भेजा गया है
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें