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श्री गंगानगर: नहरी पानी को लेकर आर-पार की जंग का एलान, किसानों ने दिया धरना, घड़साना आंदोलन दोहराने की चेतावनी

Wed, 23 Sep 2026 07:25 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्री गंगानगर

सार

सिंचाई के पानी की मांग को लेकर किसान संगठनों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है। किसान नेताओं ने कहा है कि फसल मुआवजे, बिजली आपूर्ति और नहरी पानी की मांग पूरी नहीं होने पर घड़साना जैसा बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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नहर के पानी की मांग को लेकर किसानों का हल्लाबोल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले के किसान संगठनों ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। किसान संघर्ष समिति के नेताओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो क्षेत्र के किसान फिर से वर्ष 2004 में हुए ऐतिहासिक घड़साना आंदोलन जैसी स्थिति पैदा कर देंगे।

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किसान प्रतिनिधियों ने संवाददाताओं को बताया कि इलाके में सिंचाई के पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। सरकार से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद नहरी पानी की उपलब्धता पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे रबी और खरीफ दोनों फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

सिंचाई के पानी पर गहराया विवाद
किसान समिति के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना से क्षेत्र को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पानी के बंटवारे में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। किसानों का कहना है कि टेल क्षेत्र तक पानी न पहुंचने से हजारों हैक्टेयर जमीन सूखे की चपेट में आ गई है। साथ ही किसानों ने फसल मुआवजा, कृषि बिजली की निर्बाध आपूर्ति और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज खरीद सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है। किसान नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण क्षेत्र का किसान आर्थिक संकट झेलने पर मजबूर है।
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क्या है घड़साना आंदोलन?
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में श्रीगंगानगर के घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों में सिंचाई के पानी को लेकर बहुत बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। उस समय पानी की मांग को लेकर हजारों किसान सड़कों पर उतर आए थे। वह आंदोलन इतना उग्र हो गया था कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में कई किसानों की मौत हो गई थी और पूरे इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा था। किसान संगठनों का कहना है कि यदि वर्तमान सरकार ने समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो इतिहास फिर से खुद को दोहराएगा।

प्रशासन को आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने घोषणा की है कि प्रथम चरण में जिला मुख्यालय पर विशाल धरना दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी राज्य सरकार ने वार्ता का रास्ता नहीं चुना तो संपूर्ण श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ जिले में चक्काजाम किया जाएगा।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने किसानों के इस रुख को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि वे किसान प्रतिनिधियों से बातचीत कर शांतिपूर्ण हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि किसान नेताओं ने साफ किया है कि जब तक मांगों पर लिखित सहमति नहीं मिलती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

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