फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

60 सीटों से होकर निकलेगा सरकार का रास्ता

Sun, 01 Dec 2013 07:37 AM IST
समीर शर्मा/जयपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
राजस्थान विधानसभा चुनाव के तहत रविवार शाम तक पार्टियों और उम्मीदवारों का भाग्य मतपेटियों में बंद हो जाएगा लेकिन इतना जरूर है कि 200 विधानसभा सीटों वाले राजस्थान में सरकार का रास्ता 60 वीं सीट तय करेंगी, जहां मुकाबला त्रिकोणीय व चतुष्कोणीय बना हुआ है।
विज्ञापन


यहां 140 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन 60 सीटों पर राजपा जैसी पार्टी के उम्मीदवार या निर्दलीय के रूप में खड़े हुए बागी समीकरण बिगाड़ रहे हैं। दो दर्जन सीटों पर तो बागियों व अन्य पार्टियों की स्थिति भी मजबूत कही जा सकती है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर व सवाईमाधोपुर, टोंक करौली व दौसा जिले ढूंढाड़ क्षेत्र में आते हैं, जिनमें 36 विधानसभा सीटें आती हैं। जयपुर की 19 सीटों में से छह पर कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। पिछले चुनाव में जयपुर जिले में 10 सीटें भाजपा को, तो कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं, वहीं दो सीटें अन्य के खाते में गई थीं।
विज्ञापन


इस बार भाजपा यहां नौ सीटों पर मजबूत दिख रही है, वहीं कांग्रेस दो सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन दो सीटों की स्थिति असमंजस पैदा कर रही है।

सवाईमाधोपुर, दौसा, करौली व टोंक जिलों की 17 सीटों पर शहरी क्षेत्रों में भाजपा का रुझान दिखाई दे रहा है, तो देहाती क्षेत्रों में कांग्रेस का। यहां मीणा समाज के व अजा-जजा वोट अधिक होने के कारण किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी राजपा का अच्छा दबदबा है। यहां से राजपा 6 सीटों पर मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस 3, भाजपा 4 व 4 सीटों पर ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

गहलोत की प्रतिष्ठा का सवाल
राजस्थान के 43 सीटों वाले मारवाड़ क्षेत्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का क्षेत्र है और यहां कांग्रेस की कम सीटें आने से गहलोत की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा कर सकता है। इस क्षेत्र में जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर जैसे 7 जिले आते हैं। यहां 7 जिलों की 18 सीटों पर भाजपा व 7 पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में लग रही है।

मारवाड़ी की 9 सीटों पर निर्दलियों व बागियों ने समीकरण बिगाड़ा हुआ है और बची सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है। पिछले चुनाव में यहां से कांग्रेस व भाजपा को 20-20 सीटें तथा तीन सीटें निर्दलियों को मिली थीं।

यहां जुड़ी है ओला की साख
सीकर, झुंझुनू व चुरू जिले वाले शेखावाटी क्षेत्र के तीन जिलों में 21 सीटें हैं। इस क्षेत्र में कांग्रेस के टिकट बंटवारे को लेकर केन्द्रीय मंत्री शीशराम ओला की चली।

उन्होंने विधायक रीटा चौधरी का टिकट कटवाकर मंडावा से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान को, तो नवलगढ़ से राज्य मंत्री राजकुमार शर्मा का टिकट कटवाकर प्रतिभा सिंह को टिकट दिलवाया। रीटा और राजकुमार निर्दलीय के रूप में रोड़ा बनकर खड़े हो गए हैं।

दोनों ही सीटें इस क्षेत्र की उन 13 सीटों में शामिल हैं, जहां नतीजे को लेकर कोई अंदाजा नहीं लगा पा रहा है। यहां भाजपा पांच, कांग्रेस दो सीटों पर मजबूत दिख रही है।

वसुंधरा की प्रतिष्ठा का सवाल
हाड़ौती क्षेत्र से जुड़े होने के कारण भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। यहां के झालावाड़, कोटा सहित 4 जिलों में 17 सीटें हैं और कांग्रेस-भाजपा दोनों ही 5-5 सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में लग रहे हैं।

बची 5 सीटों पर दोनों ही पार्टियां के उम्मीदवार एक-दूसरे को खासी टक्कर दे रहे हैं, तो 2 पर निर्दलियों ने समीकरण बिगाड़ रखा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस 10, तो भाजपा 7 सीटों पर विजयी रही थी।

जोशी-कटारिया की साख की लड़ाई
उदयपुर, चित्तौड़गढ़ सहित 6 जिलों वाले मेवाड़ क्षेत्र में कांग्रेस के नेता सी.पी. जोशी, तो भाजपा से गुलाबचंद कटारिया की प्रतिष्ठा की लड़ाई चल रही है। उम्मीदवार चुनने में दोनों की ही चली थी। इधर, मेरवाड़ा क्षेत्र जिसमें अजमेर व भीलवाड़ा जिले आते हैं, यहां भी जोशी की प्रतिष्ठा दांव पर है।

यहां की टिकटें भी जोशी के फैसले से बंटी हैं तथा उन्होंने अपने चहेते पूर्व वन राज्य मंत्री रामपाल जाट को भी इस क्षेत्र की आसींद सीट से टिकट दिलवाया है। मेवाड़ में 28 सीटें है।

यहां कांग्रेस 12 व भाजपा 10 सीटें अपने हक में करती दिखाई दे रही हैं, वहीं 6 सीटों पर दोनों मुख्य पार्टियों के बीच अच्छी टक्कर व निर्दलियों के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मेरवाड़ा की 15 सीटों में से कांग्रेस तीन व भाजपा 4 पर जीत दर्ज कर सकती है और 7 पर कड़ा मुकाबला चलेगा।

नहरी क्षेत्र के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व बीकानेर जिलों की 18 सीटों में से भाजपा 7 व कांग्रेस 4 सीटों पर तथा 2 सीटों पर जमींदारा पार्टी व 1 पर माकपा अच्छी स्थिति में लग रही है। 4 सीटों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इधर, अलवर, भरतपुर व धौलपुर जिलों की 22 सीटों में से भाजपा 8, कांग्रेस 6 व राजपा 2 सीटों पर मजबूती बनाए हुए है, वहीं छह सीटों पर असमंजस की स्थिति है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें