राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1987 मामलों को चिन्हित कर आपसी राजीनामा के आधार पर कुल 283 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। चिन्हित किये गए मामलों में न्यायालय में विचाराधीन एमएसीटी व सिविल प्रकरणों धन वसूली, पारिवारिक विवाद, 138 एनआई एक्ट, एमवी एक्ट व आईपीसी के राजीनामा योग्य मामलों को रखा गया।
इसी प्रकार प्रि-लिटिगेशन प्रकरणों में टेलीफोन, बिजली, पानी के लम्बित बिलों एवं बैंक वसूली के प्रकरणों को चिन्हित कर 1346 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। अपर जिला सेशन न्यायाधीश संख्या 2 आबूरोड ग्रीष्मा शर्मा एवं आशा चौहान सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्टेट आबूरोड ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में गठित बैंच के सदस्य उपखण्ड अधिकारी वीरमाराम, अधिवक्ता सदस्य विनोद कुमार सोनी व इमरान खान, अध्यक्ष बार मण्डल आबूरोड मनीष जैन, अपर लोक अभियोजक हसीब अहमद सिद्दीकी, सहायक अभियोजन अधिकारी सुश्री चेतना शर्मा, पैनल अधिवक्ता भावाराम गरासिया, अधिवक्तागण जितेन्द्र सुराणा, विपिन शर्मा, दिनेश खण्डेलवाल, ओमप्रकाश प्रजापत, आरिफखान, प्रदीप सक्सैना, सुरेन्द्रसिंह सौलंकी, महेन्द्र परिहार, सोहन सैन, शंकरलाल बारोठ, विक्रम अग्रवाल, नारायणलाल का सराहनीय योगदान रहा।
न्यायालय के कुल चिन्हित प्रकरणों 1987 प्रकरणों में से न्यायालय में लंबित 56 मोटर दुर्घठना प्रकरणों, इसी प्रकार चेक अनादरण के 34 मामले, घरेलू हिंसा व अन्य मामलों के 31 मामले, सिविल प्रकृति के 44 मामले, तथा 118 दाण्डिक शमनीय प्रकरणों में करीब 5 करोड 50 लाख 20 हजार रूपये की राशि के संबंध में आपसी समझौता एवं राजीनामा करवाकर अवार्ड पारित किए गए।