सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर नेशनल पार्क सेंचुरी की बाघिन टी-79 के तीन शावकों में से जिंदा बचे एक शावक के स्वास्थ्य में अब सुधार है। शावक ने सूप पिया है और मांसाहारी खाना भी खाया है, जिसकी वन विभाग ने वीडियो जारी कर जानकारी दी है। लेकिन बाघिन टी-79 का एक महीने बाद भी सुराग नहीं लग पाया है।
टाइग्रेस टी-79 जीवित है या नहीं? इसे लेकर संशय बना हुआ है। रणथंभौर के वन अधिकारियों के मुताबिक, रणथंभौर टाइगर रिजर्व की रेंज फलौदी से बाघिन टी-79 के शावक को सात सिंतबर को रेस्क्यू किया गया था। शावक रणथंभौर के पशु चिकित्सकों की देखरेख में है। शावक के स्वास्थ्य में काफी सुधार है। पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग और सीपी मीणा द्वारा हर घंटे शावक के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शावक ने सूप और मांसाहारी भोजन भी ग्रहण किया है।
वन विभाग के पैदल गश्ती दल को फलौदी रेंज में पांच सितंबर को वन क्षेत्र में पैदल गश्त के दौरान एक टाइगर का शावक मिला था, जिसकी हालात कमजोर होने के चलते उपचार से पूर्व ही मौत हो गई थी। बाघिन टी-79 के सर्च अभियान के दौरान छह सितंबर को गश्ती दल को बाघिन के दो शावक और मिले। शावकों को वन विभाग द्वारा उसी स्थान पर खाना खिलाने का प्रयास किया गया, लेकिन शावकों ने खाना नहीं खाया। इसके बाद दोनों शावकों को रेस्क्यू कर फलौदी रेंज लाया गया। जहां गुरुवार को एक शावक की मौत हो गई थी। जबकि तीसरे शावक का पशु चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जा रहा है, जिसके स्वास्थ्य में काफी सुधार बताया गया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, बाघिन टी-79 का फोटो 14 अगस्त को आखिरी बार ट्रैप कैमरा में रिकॉर्ड हुआ था। इसके बाद से बाघिन लापता है। वहीं बिन मां के बाघिन के दो शावकों ने दम तोड़ दिया है, जबकि तीसरा शावक पशु चिकित्सकों की देखरेख में है। जबकि बाघिन का एक माह बाद भी सुराग नहीं लगा है। ऐसे में सवाल खड़े होने लगे हैं कि बाघिन जिंदा भी है या उसकी मौत हो गई। इसे लेकर संशय बना हुआ है। यह भी आशंका है कि कहीं किसी फाइट या शिकार में तो बाघिन ज़ख्मी नहीं हो गई।