विधानसभा में कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल ने विवादित बयान दिया था। धारीवाल ने कहा था कि देश में राजस्थान रेप में नंबर वन है। राजस्थान मर्दों का प्रदेश है क्या करें? उनके इस बयान पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कड़ा विरोध किया है। पूनिया ने कहा कि मैं सुबह अखबार छिपाकर रख देता हूं कि मेरी बेटी पढ़ लेगी तो डर जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं में थोड़ी भी नैतिकता बची है तो ऐसे बदजुबानी नेता को कान पकड़कर बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।
पूनिया ने कहा कि सरकार को ये तो सोचना ही पड़ेगा कि उनकी सुरक्षा कैसे हो? इस बात पर भी सोचना पड़ेगा क्योंकि पुलिस समाज का हिस्सा है। पुलिस की भूमिका कोरोना के कालखंड में यदि मित्र जैसी दिखती है तो थाने में बलात्कार से पीड़ित महिला जब बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराने जाती है, उसी थाने का थानेदार उस महिला से बलात्कार करता है तो पुलिस का चेहरा शत्रु जैसा दिखता है। सरकार मुकदमे दर्ज करने में, एफआईआर को फ्री करने के लिए अपनी पीठ थपथपाए लेकिन साढ़े छह लाख से भी ज्यादा मुकदमें दर्ज होना, यह किसी सरकार के इकबाल खत्म होने जैसा है। यह सोचना ही पड़ेगा कि अपराध घटित क्यों होता है? केवल प्रश्न पुलिस का ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि घर के भीतर घटित होने वाला अपराध समाज की विकृति हो सकता है लेकिन घर से बाहर घटित होने वाला अपराध वह केवल समाज की विकृति नहीं है। वह शासन की विकृति है, शासन की कमजोरी है। महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, यदि इनके प्रति अपराधों का आंकड़ा देख लेंगे तो सारी चीजें शीशे की तरह साफ हो जाएगी। महिला अपराध में 23 प्रतिशत अपराधों की बढ़ोत्तरी हुई है। इसलिए राजस्थान की कानून व्यवस्था अपने आप में बड़ी चुनौती है। किसी भी प्रदेश के, किसी देश के प्रगति के जो मूल कारक होते हैं, यदि कानून व्यवस्था ठीक नहीं होगी तो कैसे निवेश आएगा? आप बजट के कुछ भी आंकड़े पेश कर देंगे। यदि कानून व्यवस्था ठीक नहीं होगी तो राजस्थान के पर्यटन की व्यवस्था से जो अर्थव्यवस्था को बल मिलता है, कौन पर्यटक आएगा यहां? जिस तरीके से उनके साथ बदसलूकी की घटनाएं होती हैं।