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Rajasthan Politics: गहलोत के नए हमलों पर सचिन पायलट की चुप्पी, करीबी बोले- उनका फोकस पेपर लीक व महंगाई पर

Mon, 08 Jun 2026 09:16 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ताजा टिप्पणियों के बाद भी कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने प्रतिक्रिया देने से दूरी बनाए रखी है। सूत्रों के अनुसार पायलट आंतरिक बयानबाजी में उलझने के बजाय नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई और राज्य सरकार के अधूरे वादों जैसे जनहित के मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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सचिन पायलट और अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस नेता सचिन पायलट पर एक बार फिर निशाना साधे जाने के बीच पायलट के करीबी सूत्रों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने इन टिप्पणियों पर चुप्पी साधने का फैसला किया है। इसके बजाय वे नीट पेपर लीक, सीबीएसई विवाद और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर भाजपा को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार, पायलट ने पहले भी गहलोत के हमलों का जवाब नहीं दिया और हमेशा कटु बयानबाजी के बजाय शालीनता को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में नीट पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं। सूत्रों ने कहा कि पायलट राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार को उसके अधूरे वादों को लेकर घेरने पर ध्यान दे रहे हैं। सरकार को सत्ता में आए ढाई साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन उसके कई वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।

क्या बोले थे गहलोत?
रविवार को गहलोत ने कहा था कि सितंबर 2022 की घटना कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ विद्रोह नहीं थी, बल्कि विधायकों की ओर से सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर असहमति थी। 25 सितंबर 2022 को जयपुर में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष को राजस्थान के नेतृत्व पर फैसला लेने के लिए अधिकृत करने वाला प्रस्ताव पारित होना था। हालांकि, कई विधायक बैठक में नहीं पहुंचे और गहलोत के करीबी नेता शांति धारीवाल के आवास पर एकत्र हो गए।
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परिणामस्वरूप, वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि पार्टी की परंपरा के अनुसार प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। गहलोत ने कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कतार में थे, लेकिन घटनाक्रम इस तरह बदला कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस बात के लिए सोनिया गांधी से खेद जता चुके हैं कि CLP बैठक में प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया।

पायलट के बगावत को लेकर गहलोत का बड़ा दावा
गहलोत ने कहा कि 25 सितंबर की घटना को लेकर बार-बार सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान के खिलाफ कभी विद्रोह नहीं हो सकता। उनके अनुसार, यह विरोध सचिन पायलट के नाम को लेकर था, क्योंकि कई विधायक उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। गहलोत ने दावा किया कि पायलट ने 2020 में उनके नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी, इसलिए विधायकों में उनके प्रति असंतोष था।

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2020 में सचिन पायलट, जो उस समय उपमुख्यमंत्री थे, ने गहलोत नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था, जिससे राजस्थान में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था। बाद में कांग्रेस नेतृत्व के हस्तक्षेप से यह विवाद सुलझाया गया। गहलोत ने यह भी दावा किया कि उन्होंने ही यूपीए सरकार के दौरान पायलट को केंद्रीय मंत्री बनवाने में भूमिका निभाई थी, लेकिन पायलट ने कभी उनका धन्यवाद नहीं किया।

गहलोत के ताजा बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंध एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में पायलट कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व की सलाह पर "भूलो और माफ करो" की नीति अपनाई है। 

पायलट ने यह भी कहा था कि वे 2024 लोकसभा चुनाव में गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के लिए पूरी ताकत से प्रचार करेंगे। 2020 में गहलोत द्वारा उन्हें "निकम्मा" और "नकारा" कहे जाने के सवाल पर पायलट ने कहा था कि उन्होंने उसी भाषा में जवाब देने का कोई फायदा नहीं समझा और सम्मान तथा शालीनता का रास्ता चुना।

पायलट के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ हुई एक बैठक में उनसे अतीत को भुलाकर आगे बढ़ने के लिए कहा गया था और उन्होंने वही किया, क्योंकि यही पार्टी और राज्य के हित में था।
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सितंबर 2022 की घटनाओं के बाद पायलट को कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। उन्होंने असम, महाराष्ट्र और केरल में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया। हाल ही में वे केरल में कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक भी रहे, जहां पार्टी ने सरकार बनाई।
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