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आरपीएससी का बाबू देता था चयन होने की गारंटी

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आरएएस प्री परीक्षा 2013 के पेपर आउट मामले की जांच के दौरान एक और परीक्षा सवालों के घेरे में आ गई है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने आरपीएससी के विधि विभाग के एक बाबू को का पता लगाया है, जिसने द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास करवाने की गारंटी ली थी।
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इस बाबू के पास ग्रीन ओएमआर शीट मिली हैं, जो अभ्यर्थियों के पास होनी चाहिए थीं। जांच में पता चला कि बाब अभ्यर्थियों से लाखों रुपए ऐंठकर उनसे कहता था कि शीट पर उन प्रश्नों के उत्तर खाली छोड़ दें, जो उन्हें नहीं आते। बाबू खुद ओएमआर शीट पर उन प्रश्नों के उत्तर पर गोले भरता था, जिससे उन अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चत हो सके। पारचा अभी एसओजी की पकड़ से दूर है।

तलाशी में मिली नौ ग्रीन ओएमआर शीट

एसओजी की जांच में पता चला कि आरपीएससी के विधि विभाग में वरिष्ठ लिपिक प्रकाश पारचा ने द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में विद्यार्थियों के चयन करवाने के नाम पर लाखों रुपए लिए हैं। जब पारचा के घर की तलाशी ली गई, तो नौ ग्रीन ओएमआर शीट मिलीं, जो इस भर्ती परीक्षा में बैठे अभ्यर्थियों के पास होनी चाहिए थीं।

अब एसओजी उन छात्रों से पूछताछ करेगी, जिनकी ये ग्रीन ओएमआर शीट पारचा के पास से बरामद हुई है। शीट के आलाव पारचा के घर से मिले अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू हो चुकी है। पारचा ने छात्रों से लिखित परीक्षा पास करवाने का झांसा ही नहीं दिया, बल्कि स्क्रीनिंग कमेटी व स्कैनिगं ऑपरेटरों से भी मिलीभगत होने का दावा किया। एसओजी ने मामला दर्ज कर लिया है और अब गायब हुए पारचा की तलाश जारी है।
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आरोपी को किया नि‌लंबित

नियमानुसार ग्रीन ओएमआर शीट परीक्षा में बैठे अभ्यर्थियों के पास होती है। अभ्यर्थी को दी जाने वाली रेड ओएमआर शीट मूल प्रति होती है और ग्रीन ओएमआर शीट कार्बन कॉपी होती है।

रेड शीट आयोग के पास रहती है, उत्तर कुंजी जारी होने पर अभ्यर्थी मिलान कर सकें। गौरतलब है कि 1997 में हुई आरएएस (मुख्य) परीक्षा का हिंदी विषय का पर्चा लीक होने पर जयपुर के बजाज नगर थाने में पारचा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले में पारचा की गिरफ्तारी हुई थी और आरपीएससी से उसे निलम्बित भी कर दिया गया था। इस मामले की विभागीय जांच जारी है। कुछ साल निलम्बित रहने के बाद पारचा को बहाल कर दिया गया था।
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