राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में विभिन्न शहरों में इस समय राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरएस) परीक्षा 2021 का आयोजन किया जा रहा है। हाल ही में राजस्थान के अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान बड़े स्तर पर हुए नकल प्रकरण के खुलासे के बाद परीक्षा में कड़े नियमों का पालन किया जा रहा है। इस दौरान बीकानेर शहर में परीक्षा केंद्र पर एक पुरुष गार्ड द्वारा महिला परीक्षार्थी के टॉप की आस्तीन काटने की घटना सामने आई है। इस घटना पर राज्य सरकार को निंदा का सामना करना पर रहा है।
इस घटना पर अब राष्ट्रीय महिला आयोग (एनडब्ल्यूसी) ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। महिला आयोग ने राजस्थान सरकार और राज्य के मुख्य सचिव को एक पत्र भी लिखा जिसमें इस घटना की निंदा की गई है। बीकानेर में परीक्षा के दौरान हुई इस घटना पर महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने लिखा कि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरएस) परीक्षा के दौरान पुरुष गार्ड द्वारा महिला परीक्षार्थी के टॉप की आस्तीन काटने की घटना का आयोग ने संज्ञान लिया है। महिलाओं का इस तरीके के उत्पीड़न से गुजरना एक बेहद अपमानजनक घटना है। महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली इस घटना से संबंधित व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनडब्ल्यूसी) ने राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरएस) 2021 परीक्षा के आयोजन के दौरान किसी महिला गार्ड की उपस्थिति न होने के उपर भी सवाल खड़े किए हैं और सरकार से इसका जवाब मांगा है। आयोग ने इस पत्र की एक कॉपी राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरएस) के प्रमुख को भी भेजी है और घटना से संबंधित व्यक्ति पर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा भी साध रही सरकार पर निशाना
राज्य में विपक्षी पार्टी भाजपा भी आरएएस परीक्षा के दौरान जारी नेटबंदी को लेकर सरकार पर तीखे हमले कर रही है। भाजपा सांसद राज्यवर्धन लिंह राठौड़ ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले एक महीने में राज्य में चार बार नेटबंदी हुई है, जबकि पिछले 10 सालों में 78 बार नेटबंदी की घटना सामने आई है। इससे राज्य को 800 करोड़ का नुकसान हुआ है। राठौड़ ने 2019 में कश्मीर में नेटबंदी को लेकर राहुल गांधी के एक ट्विट का जिक्र करते उनपर दोहरा रवैया रखने का आरोप लगाया।
राठौड़ ने इसके अलावा राज्य सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का ध्यान प्रदेश के कानून व्यवस्था की ओर बिल्कुल भी नहीं है। राज्य में डेंगू के कारण मौतें हो रही है लेकिन कई मंत्रियों को अन्य राज्यों में संगठन का प्रभार दे दिया गया है, इस कारण मंत्रालय के काम प्रभावित हो रहे हैं। राज्य की जनता मुख्यमंत्री गहलोत और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के बीच पीस रही है।