रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघ T-108 (जय) के स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किया गया है। चेहरे के पास चोट के निशान दिखने के बाद वन विभाग उसकी लगातार निगरानी कर रहा है। बाघ अब जंगल में सामान्य रूप से विचरण कर रहा है। चोट लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघ टी-108 (जय) के स्वास्थ्य में काफी सुधार दर्ज किया गया है और वह क्षेत्र में सामान्य रूप से विचरण कर रहा है। चेहरे के पास चोट के निशान दिखने के बाद से वन विभाग की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही थी। बाघ को सामान्य रूप से घूमते देखना उसकी सेहत में सुधार का एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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स्वास्थ्य में सुधार और निगरानी
वन विभाग की फील्ड टीम ने कड़ी मशक्कत करके बाघ T-108 को ट्रैक किया था। इसके बाद से ही उसकी दैनिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। मैदानी कर्मचारियों के साथ-साथ पशु चिकित्सा टीम भी बाघ के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी में जुटी हुई है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बाघ का इस तरह जंगलों में सामान्य रूप से घूमना-फिरना बेहद राहत देने वाली बात है।
वर्चस्व के लिए संघर्ष की आशंका
रणथंभौर के प्रमुख बाघों में शामिल T-108 के चेहरे पर चोट के निशान दिखाई देने के बाद किसी अन्य नर बाघ के साथ उसके क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष की आशंका व्यक्त की गई थी। माना जा रहा था कि इलाके पर कब्जे को लेकर यह जंग हुई होगी। हालांकि चोट लगने के वास्तविक कारण की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
वन विभाग की टीम की निगरानी जारी
घायल होने के बाद से ही वन विभाग बाघ की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उसकी सभी गतिविधियों पर निरंतर नजर बनाए हुए है। विभाग की फील्ड टीम बाघ की हरकतों का नियमित आकलन करती रहेगी। वन अधिकारियों के अनुसार, यदि निगरानी के दौरान कोई आवश्यकता महसूस होती है तो त्वरित और उचित कदम उठाए जाएंगे।