राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मेहनत आखिर रंग लाई। राहुल के कुछ फैसलों ने कांग्रेस की वापसी में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा उनकी रैलियों ने भी अपना असर दिखाया। इस बार वह बेहद आक्रामक नजर आए। हर मंच से उन्होंने भाजपा, वसुंधरा सरकार और मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उनका आक्रामक अंदाज ही उन्हें सुर्खियां दिला गया।
राहुल का आक्रामक अंदाज
राजस्थान में राहुल ने कुल 9 रैलियां कीं और हर रैली में वसुंधरा सरकार को कम, मोदी सरकार को ज्यादा घेरा। उन्होंने प्रमुखता से राफेल, नोटबंदी और जीएसटी का मुद्दा उठाया। किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी उन्होंने बड़ा एलान किया। युवाओं को रोजगार का मुद्दा भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया। उनकी सभाओं में खासी भीड़ भी उमड़ी। अमूमन हर रैली में उनके साथ अशोक गहलोत और सचिन पायलट नजर आए। हिंदू धर्म पर उन्होंने सीधे पीएम मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पीएम हिंदू धर्म की मूल भावना को ही नहीं समझते, वह कैसे हिंदू हैं? इस बयान ने राहुल को खूब सुर्खियां दिलाईं।
रणनीति भी रही जोरदार
राहुल ने न सिर्फ प्रचार में पूरा जोर लगाया, बल्कि रणनीति बनाने में भी समझदारी दिखाई। उन्होंने प्रदेश में चुनाव की कमान अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट को भी सौंपी। सचिन को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया। उन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में भी उतारा। यही नहीं, इस बार ऐसा दांव भी खेला जिसने सियासी पंडितों को भी चौंका दिया।
राहुल गांधी ने सिर्फ गहलोत और पायलट को ही चुनाव मैदान में नहीं उतारा बल्कि सीपी जोशी और गिरिजा व्यास जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी मैदान में उतार दिया। इस तरह सीएम पद के कई दावेदारों को चुनाव लड़ाकर भाजपा की रणनीति को गड़बड़ा दिया। खासतौर पर पायलट को मुस्लिम बहुल टोंक से उतारकर भाजपा को अपनी रणनीति में सिरे से बदलाव करने को मजबूर कर दिया। राहुल के इस फैसले के बाद भाजपा ने टोंक से अपना उम्मीदवार बदल दिया। यहां से मंत्री युनूस खान को खड़ा कर दिया गया। वह भाजपा की तरफ से एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार रहे।
बहरहाल, राहुल की आक्रामक रणनीति और चुनाव प्रचार ने कांग्रेस को अलग ही पहचान दी। पार्टी को इसका फायदा भी मिला। कांग्रेस ने भाजपा को जबरदस्त पटखनी दे डाली। राहुल की अगुवाई में कांग्रेस अब तक लगातार भाजपा से मात खा रही थी। लेकिन इस बार राहुल ने अपने अंदाज और रणनीति में बदलाव कर भाजपा को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।