राजस्थान में कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी की है। अभी तक आए रुझान कांग्रेस के पक्ष में हैं और दिख रहा है कि भाजपा को अगले पांच साल के लिए विपक्ष में बैठना होगा। इस चुनाव में भाजपा की हार के कई कारण रहे। इनमें से एक बड़ा कारण है कई नेताओं का बागी हो जाना। इस बार बड़ी संख्या में नेताओं ने भाजपा से बगावत कर डाली। कुछ तो पहले ही भाजपा से नाराज बैठे थे, और कई ने टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत की राह पकड़ ली।
घनश्याम तिवाड़ी ने बनाई अलग पार्टी
भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी वसुंधरा राजे से इस कदर नाराज थे कि उन्होंने अलग पार्टी भारत वाहिनी का गठन कर चुनाव लड़ा। उन्होंने खुलेआम वसुंधरा राजे का विरोध किया था। वह सांगानेर से 5 बार विधायक रह चुके हैं और पिछली बार करीब 60 हजार वोटों से जीते थे।
वहीं, एक और बड़े नेता निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरे। नागौर से खींवसर से विधायक बेनीवाल ने 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। राजस्थान में सबसे बड़े करीब 12 प्रतिशत से अधिक का वोट बैंक माने जाने वाले जाट समाज के नेता हनुमान बेनिवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भाजपा का खेल बिगाड़ने में बड़ा रोल निभाया। इसके अलावा कई दूसरे बागियों ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ा।
इसके अलावा भाजपा ने कई विधायक-मंत्रियों के टिकट काटे जो पार्टी से नाराज हो गए और इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। टिकट कटने से नाराज वसुंधरा राजे सरकार के मंत्री सुरेंद्र गोयल ने जैतारण से, राजकुमार रिणवा ने रतनगढ़ से, ओमप्रकाश हुड़ला ने महुवा और धनसिंह रावत ने बांसवाड़ा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा को चुनौती दी थी। विधायक अनिता कटारा, देवेंद्र कटारा, नवनीत लाल निनामा, किशनाराम नाई और गीता वर्मा भी निर्दलीय मैदान में थे।