विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। मध्यप्रदेश में तो कमलनाथ के नाम पर राय बन गई है। लेकिन राजस्थान में पेच अभी भी फंसा हुआ है। यूं तो मध्यप्रदेश के चुनाव परिणाम सबसे अंत में आए थे, लेकिन सबसे पहले सीएम का नाम भी वहीं तय हुआ। खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ के नाम की अनुशंसा की है। लेकिन राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुई अटकी हुई है। विधायकों का एक धड़ा पायलट के पक्ष में है तो दूसरा गहलोत और तीसरा धड़ा सीपी जोशी के हक में।
मिल गया फॉर्मूला
ऐसे में कलह बढ़ने की आशंका से घबराकर पार्टी ने एक फॉर्मूला निकाला है। आंतरिक सूत्रों की मानें तो पार्टी हाईकमान ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक सीएम और दो डिप्टी सीएम का विकल्प अपनाने की तैयारी की है। इसके तहत अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री का पद देकर, सचिन पायलट और सीपी जोशी को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया जा सकता है। इस तरह से मौजूदा पेच भी साफ हो जाएगा और राज्य में स्थिर सरकार भी बन जाएगी।
लेकिन क्या सचिन पायलट मानेंगे?
ये खबरें सियासी फिजां में नतीजों के दिन यानी मंगलवार से ही तैर रही हैं कि सचिन पायलट नाराज हैं। दरअसल, नतीजों में कांग्रेस की निर्णायक बढ़त के साथ ही सीएम के लिए अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट की जंग का आगाज हो गया था। ये खबर जब पायलट के कानों तक पहुंची तो वो नाराज हो गए। बाद में उनको किसी तरह मनाया गया।
आज भी दिन भर उनके समर्थक जुटे रहे। करीब पांच घंटे तक, जयपुर में चली बैठक के बाद विधायकों और समर्थकों ने सचिन पायलट के नाम के नारे लगाए। ऐसे में क्या उन्हें ये फॉर्मूला स्वीकार्य होगा? ये एक बड़ा सवाल है।
ये सवाल इसलिए भी है क्योंकि बीते करीब चार साल में वो सचिन पायलट ही हैं जिन्होंने हजारों किलोमीटर की पदयात्राएं कर सूबे में कांग्रेस के जनाधार को नए सिरे से खड़ा करने का काम किया। जाहिर है, अब वो इनाम का इंतजार भी कर रहे होंगे।