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यहां 11 रुपये में धुल जाएंगे आपके सारे पाप, मिलता है 'पाप मुक्ति' सर्टिफिकेट

Wed, 25 May 2016 01:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कहा जाता है गंगा में नहाकर इंसान के सारे पाप दूर हो जाते हैं, गंगा के प्रति यह आस्‍था उसकी पावनता को लेकर है लेकिन अगर एक मंदिर के बारे में भी ऐसा ही दावा किया जाए कि वहां जाकर सारे पाप खत्म हो जाते हैं तो उसके बारे में जिज्ञासा जागना स्वभाविक है। 
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यह दावा किया जा रहा है राजस्‍थान के प्रतापगढ़ जिले के शिव मंदिर के बारे में। ऐसा नहीं है मंदिर केवल इसका दावा ही करता है बल्कि यहां इसके लिए बकायदा 'पाप मुक्ति' का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है।

प्रतापगढ़ के गौतमेश्वर महादेव पापमोचन तीर्थ स्‍थल में शिव मंदिर स्थित है। इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को उनके पाप मुक्ति का वादा किया जाता है। इसके लिए मंदिर में बने एक कुंड में स्नान करना होता है और इसके बाद 11 रुपये का दान करने के बाद बकायदा आपको पाप मुक्ति का सर्टिफिकेट दिया जाता है। 
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टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार मंदिर प्रबंधन का दावा है कि परिसर में बने मंदाकिनी कुंड में आजादी के बाद से अभी तक जितने भी लोगों ने स्नान किया है उन सभी का रिकार्ड उनके पास है। 
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पुजारियों की एक संस्‍था देती है सर्टिफिकेट

यहां पुजारियों की एक संस्‍था है जिसे अमीनत कछारी कहा जाता है वो श्रद्धालुओं को पाप मुक्ति सर्टिफिकेट देने के बदले में 11 रुपये लेती है, जिसमें एक रुपया सर्टिफिकेट का और 10 रुपये दोष निवारण का लिया जाता है। पुजारी नंद किशोर शर्मा बताते हैं कि हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं और कुंड में स्नान कर पाप मुक्ति सर्टिफिकेट लेकर वापस लौटते हैं। 

यहां की प्रसिद्धी के कारण सदियों से इसे ग्रामीणों का हरिद्वार भी कहा जाता है। आदिवासी क्षेत्रों में भी इसका बहुत प्रभाव है। शर्मा बताते हैं मई में आठ दिन के लिए लगने वाले गौतमेश्वर मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। हर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। हालांकि वो ये भी कहते हैं कि यहां आने वाले ज्यादातर लोग सर्टिफिकेट नहीं लेते हैं। इस साल आठ दिनों के मेले में दो लाख से ज्यादा लोगों ने कुंड में स्नान किया लेकिन सर्टिफिकेट लेने मात्र तीन लोग ही आए। 

एक पुरानी मान्यता है कि गौतम ऋषि के श्राप के कारण एक जानवर की मौत हो गई थी, जिसके पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने कुंड में डुबकी लगाकर खुद को पाप मुक्त किया। इसके बाद से इस कुंड की मान्यता पाप मुक्ति कुंड के रूप में हो गई। एक अन्य पुजारी कन्हैया लाल बताते हैं कि जब लोग खेती किसानी के दौरान अनजाने से पशु पक्षी या उनके अंडों को नुकसान पहुंचाते हैं तो इसकी माफी के लिए वह कुंड में आकर स्नान करते हैं।
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