राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी मामले में एसोसिएट प्रोफेसर को तुरंत प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया गया है। इसके अलावा इन मामले में जो भी शामिल है, उनकी जानकारी ली जा रही है। पूरे मामले को लेकर बाल आयोग गंभीर है और तुंरत कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल स्कूल के एनुअल प्रोग्राम में शामिल होने के लिए बाड़मेर पहुंची। इस दौरान बाल संरक्षण अधिकार आयोग अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, बाल आयोग द्वारा प्रत्येक दिन जनसुनवाई की जाती है। वहीं, शिकायत आने पर तुरंत संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाती है। हाल ही के दिनों में निजी संस्थानों द्वारा चाहे जयपुर, नागौर या फिर कोटा का मामला है। इसमें हमारे सामने जो बात निकल कर आई है कि एग्जाम में अच्छे नंबरों के बदले छात्राओं पर फिजिकल रिलेशन का दबाव बनाया जा रहा है।
यह बहुत ही गंभीर है और खेद की बात है। बाल आयोग इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के स्कूलों और कोचिंग के लिए एसओपी जारी करेगा, ताकि बच्चों और बच्चियों का भविष्य खराब न हो। स्टूडेंट्स को स्वच्छ वातावरण शिक्षा मिल सके। ऐसे टीचर द्वारा जो ऐसी हिम्मत कर लेते हैं। ऐसे टीचर के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई जल्द हो, इसके लिए कोर्ट और सरकार से अपील करेंगे।
कोटा में मामले में बाल आयोग ने तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी...
संगीता बेनीवाल का कहना है, कोटा मामले की जानकारी मिलते ही तुंरत प्रभाव से संज्ञान में लेते हुए प्रशासन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही साथ टीचरों को तुंरत प्रभाव से टर्मिनेट भी करवा दिया है। इसके अलावा इन मामले में जो भी शामिल हैं, उनकी जानकारी ले रहे हैं। पूरे मामले को लेकर बाल आयोग गंभीर और तुंरत कार्रवाई की जाएगी।
संगीता बेनीवाल ने कहा- स्टूडेंट से अपील की है कि संयम रखें....
बाल आयोग अध्यक्ष ने कोटा मामले में प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट से अपील की है कि स्टूडेंट संयम रखें, हम उनका दर्द समझते हैं। उनके दोस्तों के साथ जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए। लेकिन थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। छात्र संघ अध्यक्षों से अपील है कि वो लोग भी धैर्य बरतना चाहिए और सरकार और आयोग पर विश्वास रखना चाहिए। पूरा विश्वास दिलाती हूं कि उनके अभिभावकों, स्टूडेंट को बाल आयोग उनकी तकलीफ में साथ खड़ा है। बच्चियों के साथ भविष्य खराब करने का प्रयास किया गया है, उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई करेंगे। बच्ची की मानसिक पटल पर ऐसी कोई बात नहीं रहे, उसके लिए बेहतर काउंसलिंग करवाकर मुख्य धारा से जोड़ने का काम बाल आयोग करेगा।