राजस्थान में मतदान की तारीखें आने के बाद पार्टियों की चुनावी तैयारी की गति तिगुनी-चौगुनी हो जाएगी। वोटिंग ट्रेड को देखते हुए कहा जा सकता है कि राजस्थान की जनता ने हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन किया है।
सत्तारूढ़ पार्टी से हमेशा नाखुश रहने वाली जनता के इस ट्रेंड के चलते भाजपा इस बार इसे खुद के लिए सत्ता में आने का बेहतर अवसर मान रही है।
दोनों पार्टियां इस महीने के अंत तक सभी उम्मीदवारों की घोषणा करने की बात कह चुकी हैं और उम्मीदवारों के नाम तय करने में जोर-शोर से जुटी हुई हैं।
कांग्रेस को आए थे पसीने
2008 में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस को भी सरकार बनाने में पसीने आए थे और उन निर्दलियों को सरकार में शामिल किया गया था, जो कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर कांग्रेस के खिलाफ ही मैदान में उतरकर जीते थे।
पिछले परिणाम के तहत विधानसभा की 200 सीटों पर कांग्रेस को 96, भाजपा को 78, बसपा को 6 और अन्य को 20 सीटें मिली थीं।
कांग्रेस को बसपा से जीते छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर 102 सीटों का गणित बैठाना पड़ा था, वहीं दर्जनभर निर्दलियों ने कांग्रेस को समर्थन दिया था।
नपे मंत्री बने, भाजपा का चुनावी मुद्दा
विपक्षी दल भाजपा के पास इस विधानसभा चुनाव में मंत्रियों के राष्ट्रीय स्तर पर गूंजे यौन शोषण का अहम मुद्दा है। एक सीडी के सार्वजनिक हो जाने के बाद जल संसाधन मंत्री रहते महिपाल मदेरणा पर लगे भंवरी देवी यौन शोषण व हत्या के आरोप देशभर में चर्चा का विषय रहे।
वहीं भीलवाड़ा डेयरी चेयरमैन की पत्नी पारस देवी की मौत के मामले में तत्कालीन वन राज्य मंत्री रामलाल जाट और हाल ही उठे महिला के यौन शोषण के मामले में खादी राज्य मंत्री का पद गंवाने वाले बाबू लाल नागर जैसे नेता नप गए।
कांग्रेस के पूर्व सार्वजनिक निर्माण मंत्री प्रमोद जैन भाया, पूर्व मोटर गैराज मंत्री भरोसी लाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और इन्हें भी मंत्री पद से हटाना पड़ा।
कांग्रेस बनाएगी इन्हें ढाल
कांग्रेस के पास भाजपा के तीरों से बचने के लिए ढाल के रूप में जनता को दी सौगातें हैं। जैसे नि:शुल्क दवा व जांच, शिशु-जननी सुरक्षा योजना, डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम, खाद्य सुरक्षा, पेंशन जैसी योजनाएं हैं।
कांग्रेस ने इन योजनाओं को अपने चुनाव प्रचार अभियान का हिस्सा भी बनाया हुआ है और प्रचार भी जोर-शोर से किया गया, जिससे पक्ष में माहौल बना रहे।
मुख्यमंत्री पर भी उठी अंगुली
अपने रिश्तेदारों व चहेतों को सेंड स्टोन के खनन पट्टे जारी करने के मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अंगुली उठी। हाल ही में निचली अदालत ने इस मामले में पुलिस जांच के आदेश भी जारी किए हैं।
इससे पूर्व एक अन्य निचली अदालत ने मुख्यमंत्री पर काली सिंध बांध निर्माण के ठेके की रकम, दोगुनी से भी ज्यादा करने के आरोप में पुलिस जांच के आदेश जारी किए गए।
भाजपा सरकार के समय यह ठेका 200 करोड़ में तय हुआ था, लेकिन कांग्रेस सरकार बनने के बाद पुराने ठेके को निरस्त कर नए रूप में 450 करोड़ रुपये का कर दिया गया।