राजस्थान में उत्पन्न हो रहे हालात, चार महीने पहले मध्यप्रदेश में हुए घटनाक्रम से बिल्कुल मेल खा रहे हैं। विधायकों के पार्टी छोड़ने से कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। ऐसे में सूबे में मध्यप्रदेश जैसे हालात पैदा होने से सीएम गहलोत की धड़कन तेज हो गई है, उन्हें डर है कि कहीं उनके साथ भी कमलनाथ जैसा सलूक न हो जाए।
सीएम द्वारा दिए जा रहे बयान इन बातों को और पुख्ता कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोग जहां महामारी से लड़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं वहीं ये (भाजपा नेता) लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़ फोड़ करें, खरीद फरोख्त करें इन तमाम काम में लगे हैं।
राजस्थान का हालिया घटनाक्रम मध्यप्रदेश से बिल्कुल मेल खाता है। दोनों ही राज्यों के घटनाक्रम में बहुत हद तक समानताएं हैं। मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों का इस्तीफा दिलवाया और इसका परिणाम कमलनाथ को सत्ता गंवाकर चुकाना पड़ा।
इस्तीफे से पहले विधायकों को भाजपा शासित राज्यों में ठहराया गया। वहीं, राजस्थान के 24 कांग्रेस विधायकों को भी भाजपा शासित राज्य हरियाणा में ठहराया गया है। ये सभी विधायक गुड़गांव के मानेसर के एक होटल में ठहरे हुए हैं। कमलनाथ को युवा सिंधिया से चुनौती मिली थी, दूसरी तरफ गहलोत को पायलट से चुनौती मिल रही है। सचिन पालयट पिछले तीन दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को जब कैबिनेट बैठक की तो, उसमें बतौर उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी शामिल होना था। लेकिन वह इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इस बैठक में पायलट के समर्थक मंत्री और विधायक भी नहीं पहुंचे। हालांकि, पायलट ने बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर कोई बयान नहीं दिया।
एक रिपोर्ट में कहा गया कि राजस्थान के लगभग 10 विधायक भी दिल्ली में हैं। ये विधायक कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर अपनी पीड़ा पार्टी अध्यक्ष को बताना चाहते हैं। वहीं, कुछ विधायक गुड़गांव के मानेसर में भी ठहरे हुए हैं।
मुख्यमंत्री गहलोत ने भाजपा पर विधायकों की खरीद खरोख्त का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भाजपा विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये का प्रलोभन दे रही है और उनकी सरकार को अस्थिर करना चाहती है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि यह कांग्रेस के भीतर अंदरूनी उठापटक है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस आपसी गुटबंदी से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बेबुनियादी आरोप लगा रही है।
शनिवार देर रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को देर रात कई विधायकों और मंत्रियों ने समर्थन पत्र सौंपे और गहलोत के नेतृत्व में भरोसा जताया। देर रात राजस्थान की सीमा भी सील कर दी गई है। बिना पास राजस्थान से बाहर जाने की इजाजत नहीं है। हालांकि सरकार ने कोरोना संक्रमण को सीमा सील करने की वजह बताया, लेकिन माना जा रहा है कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देख विधायकों के बाहर जाने की आशंका में फैसला किया गया है।
राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्य हैं, जिसमें कांग्रेस के 107 विधायक हैं। वहीं, उसे 13 स्वतंत्र विधायकों का समर्थन भी हासिल है। इसके अलावा उसे आरएलडी के एक विधायक सुभाष गर्ग ने भी सरकार को समर्थन दिया हुआ है। गर्ग वर्तमान में मंत्री भी हैं। इस तरह गहलोत सरकार को 121 विधायकों का समर्थन मिला हुआ है। वहीं, भाजपा के पास केवल 72 विधायक हैं।