हमारे देश में जहां हजारों रेप के मामले कानूनी कार्रवाई में उलझकर बरसों तक लटके रहते हैं, वहीं राजस्थान पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए नई मिसाल पेश की है।
राजस्थान के कई जिलों के युवा आईपीएस अधिकारियों ने बिना समय गंवाए दुष्कर्म के मामलों में तुरंत आरोप पत्र दाखिल कर जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास बरकरार रखने की कोशिश की है। बाड़मेर पुलिस ने जहां आठ दिनों में आरोप पत्र दाखिल किया, वहीं महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में बूंदी और सिरोही पुलिस ने इस काम को अंजाम तक पहुंचाने में महज 3-4 दिन ही लगाए।
बूंदी जिले में श्याम सुंदर नाम के एक मजदूर ने 13 साल की बच्ची के साथ अपने निवास स्थान पर कथित तौर पर दुष्कर्म किया था। यह मामला 4 जनवरी को प्रकाश में आया था और आरोपी फरार था। मगर जल्द ही उसे पकड़ लिया गया। बूंदी की एसपी प्रीति चंद्रा ने इस संबंध में बताया कि इस केस को प्राथमिकता पर रखा गया था।
इस केस की जिम्मेदारी महिला अधिकारी को सौंपी गई और मजिस्ट्रेट भी महिला ही थी। इससे तेजी से कार्रवाई करने में आसानी हुई। इस केस में 7 जनवरी को आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई कोई रिकॉर्ड कायम करने के लिए नहीं बल्कि सिस्टम पर आम जनता का विश्वास बहाल करने के लिए की गई है।
सिरोही की एसपी लवली कटियार ने भी इसी तरह के कदम उठाते हुए महज 95 घंटे में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। महिला से कथित तौर पर बलात्कार के मामले में 50 वर्षीय जगया के खिलाफ सिरोही पुलिस ने 31 दिसंबर को मामला दर्ज करने के बाद 4 जनवरी को आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
बाड़मेर पुलिस ने 14 वर्षीय लड़की के साथ गैंग रेप के मामले में मनोहर, नरेंद्र और शेरा राम के खिलाफ महज आठ दिन में 3 जनवरी को आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बाड़मेर के एसपी राहुल बरहत ने दावा किया कि बाड़मेर में यह पहला केस है, जिसमें सिर्फ आठ दिनों में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।
पिछले महीने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी सीनियर अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में जांच में तेजी लाए।