राजस्थान सरकार दक्षिण राजस्थान में जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने उदयपुर दौरे के दौरान खुलासा किया कि राज्य सरकार ने जाखम-जयसमंद-बड़गांव-मातृकुण्डिया मेगा जल परियोजना की डीपीआर तैयार कर केंद्रीय जल आयोग को भेज दी है। करीब 10 हजार करोड़ रुपए की यह परियोजना मंजूरी मिलने के बाद दक्षिण राजस्थान की सबसे बड़ी जल योजनाओं में शामिल होगी। मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के जरिए पेयजल और सिंचाई दोनों क्षेत्रों में बड़े स्तर पर राहत मिलेगी। साथ ही अतिरिक्त जल स्रोतों का बेहतर उपयोग भी किया जा सकेगा।
तीन बजट में 900 करोड़ की मंजूरी
सुरेश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार जल आत्मनिर्भर राजस्थान के विजन पर काम कर रही है। उदयपुर संभाग में पिछले तीन बजट के दौरान 900 करोड़ रुपए से अधिक की जल परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उन्होंने बताया कि 2026-27 के बजट में अकेले उदयपुर संभाग के लिए 275 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।
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देवास परियोजना पर सरकार का फोकस
उदयपुर की बहुप्रतीक्षित देवास तृतीय और चतुर्थ चरण परियोजना को लेकर भी सरकार गंभीर है। मंत्री ने अधिकारियों को दिसंबर 2027 तक हर हाल में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं 200 करोड़ रुपए की लागत वाली बागोलिया फीडर परियोजना से मावली क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति मजबूत होगी और करीब 3700 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। राजसमंद में 131 करोड़ रुपए की खारी फीडर परियोजना पर भी काम जारी है।
रामजल सेतु परियोजना पर भी तेजी
मंत्री ने दावा किया कि राज्य की महत्वाकांक्षी रामजल सेतु परियोजना पर भी तेजी से काम हो रहा है। इसके पूरा होने पर राजस्थान के आधे जिलों में पेयजल और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। सुरेश रावत ने कहा कि सभी परियोजनाओं की सरकार और विभाग स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग हो रही है। अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं।