रुपया कमाने के लिए भ्रष्टाचारी नित नए रास्ते ढूंढ ही लेते हैं। हाल ही में मनरेगा श्रमिकों ने शिकायत की है कि लवाण पंचायत समिति की सिंगवाड़ा ग्राम पंचायत में जिम्मेदारों ने भ्रष्टाचार की तमाम हदें पार करते हुए बगैर मजदूरी किए मजदूरों के खातों में पैसे डाले और फिर डरा-धमकाकर उनसे पैसा वापस भी ले लिया।
दरअसल मनरेगा श्रमिकों के खातों में जब बगैर मजदूरी किए पैसा आया तो मजदूर चौंक गए लेकिन थोड़े समय बाद ही असलियत सामने आ गई। मनरेगा श्रमिक कौशल्या देवी और भागादेवी की मानें तो जब उनके बैंक खातों में अचानक पैसा आया तो इन मजदूरों ने पैसे की पड़ताल की। बाद में पता चला कि यह पैसा मनरेगा से आया है। श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने जब मजदूरी की ही नहीं तो उनके खाते में पैसे कैसे आए और फिर जब आए तो फिर डरा-धमकाकर खातों में आए हुए पैसे वापस क्यों ले लिए।
पिछले दिनों ग्राम पंचायत सिंगवाड़ा के मजदूरों ने जिला परिषद में लिखित शिकायत देकर उक्त मामले में जांच की मांग की है। मजदूरों का आरोप है कि विकास अधिकारी, जेईएन, एईएन, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच की मिलीभगत से जेसीबी से कार्य करवाकर मजदूरों के खातों में मनरेगा से भुगतान करवाया गया और बाद में मेट की सहायता से मजदूरों के बैंक खातों मे आया भुगतान वापस ले लिया गया।
मजदूरों द्वारा जब जिला परिषद में शिकायत की गई तो आनन-फानन में राजीनामा दिखाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। सिंगवाड़ा में 7 जनवरी 2024 को विकसित भारत संकल्प यात्रा कैंप में मजदूरों ने लिखित शिकायत कैंप प्रभारी एवं भाजपा के प्रतिनिधि विजय बैरवा जिला कोषाध्यक्ष एससी मोर्चा को दी थी।
विजय बैरवा ने बताया कि इस मामले पर उन्होंने नोडल अधिकारी रामदयाल शर्मा से बात की तो रामदयाल ने बताया कि इस मामले की जांच जिला परिषद एक्सईएन के पास विचाराधीन है।