राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस
निरंजन आर्य ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सचिव होने का असल फायदा उठाया।
वे अपनी पत्नी संगीता आर्य को सोजत (पाली) से टिकट दिलवाने में कामयाब हो
गए।
जब मामले ने तूल पकड़ा, तब सरकार ने उनके हाथ तबादला आदेश थमाया। अब
उन्हें मुख्यमंत्री के सचिव पद से हटाकर आयुर्वेद विभाग में सचिव पद पर
लगाया गया है।
जीजा-साले की टक्कर
बीकानेर पश्चिम विधानसभा सीट पर लोगों को जीजा-साले की रोचक और कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। गोपाल जोशी (जीजा) भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, बी.डी. कल्ला (साले) कांग्रेस से प्रत्याशी हैं।
पिछले चुनाव में भी दोनों आमने-सामने थे और जीजा, साले पर भारी पड़े थे। उन्होंने साले को 18 हजार से अधिक वोटों से हराया था। दोनों की आपसी कड़वाहट तब से चल रही है, जब दोनों कांग्रेस में थे।
इस सीट पर ब्राह्मण वोट अधिक हैं और दोनों ही प्रत्याशी ब्राह्मण व रिश्तेदार हैं, जिससे मतदाता असमंजस में हैं। अब साले पिछली हार का बदला ले पाते हैं या जीजा अपनी जीत दोहरा पाते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा।
बेटिकट रह गए भैरोंसिंह शेखावत को हराने वाले
पूर्व उपराष्ट्रपति व राजस्थान के दिग्गज नेता रहे भैरों सिंह शेखावत को हराने वाले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जर्नादन सिंह गहलोत बे-टिकट रह गए।
वर्ष 1972 में गहलोत ने शेखावत को जयपुर की तत्कलीन गांधी नगर सीट से हराया था। गहलोत को 21 हजार से अधिक व शेखावत को करीब 16 हजार वोट मिले थे।
पिछली बार बड़े अंतर से हारने के बाद गहलोत को कांग्रेस से टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने भाजपा का हाथ थाम लिया।