प्रदेश में एससी की 34 तो एसटी की 25 सीटे हैं। आरक्षित पांच जिलों की करीब 30 सीटों पर एससी-एसटी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। भाजपा संगठन एससी-एसटी प्रभुत्व वाली 89 सीट पर ग्राउंड स्तर काम कर रहा है। हर विधानसभा में 10-10 वर्करों की 5-5 टोली दिन-रात काम करने में जुटी है। अभियान में मोदी कार्यों से प्रभावित करने की रणनीति के तहत काम किया जा रहा है।
मरुधरा में सियासी घमासान के बीच बीजेपी इस बार अपनी 2018 की कई खामियों को दुरुस्त करने में जुटी हुई है। सत्ता तक का सफर तय करने के लिए बीजेपी संगठन पूरी रणनीति के तहत इस समय प्रदेश की अनुसूचित जाति (एससी) ओर अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आरक्षित 59 सीट तो पांच जिलों की 30 सीटों पर निर्णायक एससी-एसटी वोटर के आधिपत्य वाली 89 सीटों पर सीरियस मोड में काम कर रहा है। पहले बीजेपी का इन सीटों पर प्रभुत्व रहता था लेकिन 2018 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस ने सेंधमारी कर सत्ता तक का सफर तय किया था। इसी के चलते 2023 का समर जीतने के लिए बीजेपी के प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर इस समय इन 89 पर आधिपत्य जमाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
संघठन मंत्री चन्द्रशेखर इसके लिए हर विधानसभा टीम में ग्राउंड स्तर पर 10-10 की टोली में बीजेपी वर्कर एक-एक घर, एक-एक व्यक्ति से सीधा संपर्क करने के अभियान में जुटे हुए हैं। इसके लिए उन्हें कुछ सामग्री भी प्रदान की जा रही है और पीएम नरेंद्र मोदी के 9 साल के कार्यों से भी अवगत कराया जा रहा है। संगठन की कोशिश है कि कैसे भी हो इस बार इन सीटों पर पुन : आधिपत्य जमाना है।
बीजेपी के चाणक्य संगठन महामंत्री चंद्रशेखर इस पूरे अभियान की प्रतिदिन रिपोर्ट लेते हुए इसकी मॉनिटरिंग खुद ही कर रहे हैं।
प्रदेश की 200 विधानसभा सीट में से 59 सीट अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति एसटी समुदाय की हैं। इनमें से एससी की 34 तो एसटी की 25 सीट आरक्षित हैं। वहीं भरतपुर, धौलपुर, करौली, अलवर, चूरू पांच जिलों की करीब 30 सीटों पर यह वोटर निर्णायक स्थिति में है। इन दोनों जाति की प्रदेश में करीब 18 परसेंट आबादी यानि करीब सवा करोड़ लोग हैं। इस कैटेगरी में 50 से अधिक जातियां, उपजातियां आती हैं।
2018 विधानसभा की बात करें तो कांग्रेस ने एससी व एसटी की 31 सीटें जीतीं थीं। वहीं बीजेपी के हिस्से 21 सीटें ही आईं थीं। जबकि बीटीपी व आरएलपी ने -2-2 तो निर्दलीय ने 3 सीट जीतीं थीं। वहीं 2013 में अकेले बीजेपी ने 50 सीटों पर फतेह हासिल की थी। 2018 में एससी-एसटी वोटर बीजेपी से दूर हुए तो सत्ता की कुर्सी भी उसके हाथ से खिसक गई। इसी के चलते एक बार फिर से संगठन महामंत्री ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए अपनी निगाहें एससी-एसटी वोटरों पर टिकाकर वहां पर अभियान शुरू कर रखा है। इसी के चलते बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी की कई रैलियां व जनसभाएं भी एससी-एसटी एरिया में ही करवाई गईं थीं और आगे भी होना प्रस्तावित है। अकेले मेवाड़ की 28 में से 17 सीटें आरक्षित हैं और इसी के चलते सीएम अशोक गहलोत व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी यहां सक्रिय हैं, तो बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी यहीं पर सर्वाधिक प्रोग्राम करवा रहा है।
बीजेपी ने 2023 में यदि सत्ता का सफर तय करना है, तो उसका रास्ता एससी-एसटी सीटों से होकर ही जाता है और उनकी रणनीति सफल हुई तो संगठन महामंत्री चंद्रशेखर बड़े बाजीगर साबित होंगे। हालांकि वह अपनी रणनीति में सफल होने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आते हैं।
यह सामग्री की जा रही वितरित ।
89 सीटों पर सक्रिय बीजेपी वर्कर टीम हर घर में कुछ सामग्री का वितरण भी कर रही है। बताया जाता है कि वर्कर वॉल कैलेंडर, अनुसूचित जनजाति के लिए मोदी सरकार द्वारा किए गए कल्याणकारी कार्यों का पत्रक, स्टीकर एवं भगवान बिरसा मुंडा एवं गोविंद गुरु की-रिंग हर घर में देकर उनसे अपनत्व का रिश्ता बना रहे हैं। ताकि चुनाव के समय एक बार फिर बीजेपी के हाथ से निकला एससी-एसटी वोटर उसके साथ आ सके।
एसटी रिजर्व सीटें
जामवारामगढ़, बस्सी, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, टोडाभीम, सापोटरा, लालसोट-बामनवास, पिंडवाला-आबू, गोगुंदा, झाड़ोल, खेरवाड़ा, उदयपुर ग्रामीण, सलूम्बर, दरियावद, डूंगरपुर, आसपुर, सागवाड़ा, चौरासी, घाटोल, गढ़ी, बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, प्रतापगढ़, किशनगंज।
एससी रिजर्व सीटें
रायसिंहनगर, अनुपगढ़, पीलीबंगा, खाजूवाला, सुजानगढ़, पिलानी, धोद, दूदू, बगरू, चाकसू, अलवर ग्रामीण, कठूमर, वैर, बयाना, बासेरी, हिंडौन, सिकराय, खंडार, निवाई, अजमेर दक्षिण, जायल, मेड़ता, सोजत, भोपालगढ़, बिलाड़ा, चौहट्टन, जालौर, रेवदर, कपासन, शाहपुर, केशवरायपाटन, रामगंज मंडी, बारां-अटरू एवं डग।