राजस्थान में जन प्रतिनिधियों की सुनवाई को लेकर संवेदनहीन अफसरों को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नाराजगी झेलनी पड़ी। मुख्यमंत्री ने बुधवार को कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों की कांफ्रेंस में कहा कि जनप्रतिनिधियों के फोन व पत्रों का समय पर जवाब दें।
उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री होते हुए भी पांच हजार पत्रों के जवाब दे सकती हूं और फोन नहीं उठाने की स्थिति में कॉल बैक कर सकती हूं, तो कलेक्टर-एसपी ऐसा क्यों नहीं कर सकते। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपना व्यवहार सुधारने की हिदायत दी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जब भी किसी समस्या को लेकर किसी का फोन आता है और वह किसी कारणवश फोन नहीं उठा पाएं तो कॉल बैक जरूर करें।
अपनी समस्याओं को लेकर जनता को राजधानी आना पड़ता है जबकि स्थानीय समस्याएं जिला स्तर पर ही हल हो जानी चाहिए। ओलावृष्टि से प्रभावित जिलों में जो किसान अब तक मुआवजे से वंचित हैं, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।
राजे ने कहा कि ऐसा देखने में आया है कि आम जन से सीधे जुड़े विभागों के कई अधिकारी शुक्रवार शाम को बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ देते हैं और सोमवार देर तक कार्य पर लौटते हैं। उन्होंने कलक्टरों को निर्देश दिए कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाएं।