मंगलवार को क्या हुआ?
49 नवंबर मंगलवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर आए थे। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा को लेकर बनाई गई कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में सीएम गहलोत, सचिन पायलट सहित कांग्रेस के करीब 35 बड़े नेता शामिल हुए। बैठक में वेणुगोपाल ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर, अब किसी ने एक दूसरे के खिलाफ एक शब्द भी बोला तो आज वह जहां है, कल वहां नहीं होगा। यानी पार्टी उसे बाहर का रास्ता दिखा देगी।
बैठक में दी गई इस चेतावनी के साथ वेणुगोपाल ने करीब 30 मिनट तक गहलोत और पायलट के साथ चर्चा की। जिसके वेणुगोपाल गहलोत-पायलट को साथ लेकर बाहर आए। उन्होंने पार्टी में सबकुछ ठीक होने का संदेश देते हुए कहा- दिस इज राजस्थान (यह राजस्थान है)। इस दौरान सीएम गहलोत ने कहा कि राजस्थान में सब एकजुट हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि गहलोत और पायलट असेट्स (बहुमूल्य) ही हैं। सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा का राजस्थान में उत्साह और ऊर्जा के साथ स्वागत किया जाएगा। यह सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी के साथ एक ऐतिहासिक यात्रा होगी। हम सब मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे, हमें कोई उकसा नहीं सकता है।
क्या कहा था गहलोत ने?
24 नवंबर को सीएम अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू में पायलट के खिलाफ कई गंभीर बातें कहीं थीं। गहलोत ने कहा कि पायलट ने गद्दारी की है, वह मुख्यमंत्री नहीं बनाए जा सकते। उन्हें तो दस विधायकों तक का समर्थन भी नहीं है। उन्हें कोई स्वीकार नहीं करेगा। पायलट की गद्दारी को मैंने और हमारे विधायकों ने भुगता है। हमें 34 दिन होटलों में रहना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान भी इसमें शामिल थे।
पायलट ने किया था पलटवार
गहलोत के बयान का सचिन पायलट ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह के अनुभवी व्यक्ति को ऐसे शब्द शोभा नहीं देते। गहलोत मुझे निकम्मा, नाकारा, गद्दार और न जाने क्या-क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसी भाषा बोलना मेरी परवरिश का हिस्सा नहीं रही। मेरा बार-बार नाम लेने, कीचड़ उछालने और आरोप-प्रत्यारोप करने से कोई फायदा नहीं होने वाला। कोई नेता इतना अनुभव रखता हो, वरिष्ठ हो और जिसे पार्टी ने इतना कुछ दिया हो, उसके लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। इस तरह के झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने की उनसे उम्मीद नहीं थी।
25 सितंबर को क्या हुआ था?
कांग्रेस आलाकमान ने अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर विधायक दल की बैठक में भेजा था। विधायकों ने बैठक से दूरी बनाई और आलाकमान के निर्देशों की अवहेलना की। तीन वरिष्ठ विधायकों के घर पर उन्होंने बैठक कर गहलोत पर भरोसा जताया था। उनका आरोप था कि अजय माकन सचिन पायलट के पक्ष में एक लाइन के प्रस्ताव पर मुहर लगवाना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया। बैठक के बाद माकन ने शांति धारीवाल, धर्मेंद्र राठौड़ और महेश जोशी सहित तीन नेताओं के खिलाफ अनुशासनहीनता की रिपोर्ट हाईकमान को दी थी। जिसके बाद तीनों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया था। तीनों नेता अपने जवाब भी दे चुके हैं। इसके बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे नाराज होकर राजस्थान प्रभारी अजय माकन ने पद से इस्तीफा दिया था।