मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार में मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल होने वाला है। राजस्थान में लंबे समय से प्रतीक्षित कैबिनेट फेरबदल को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, अजय माकन और केसी वेणुगोपाल के बीच बुधवार को बैठक के बाद अंतिम रूप दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस 'एक नेता-एक पद' के फार्मूले को लागू करने की तैयारी कर रही है। इस फार्मूले के मद्देनजर गहलोत मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों को उनके पद से हटाया जा सकता है क्योंकि इन नेताओं को पहले ही पार्टी में जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं।
इस फेरबदल में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गोविंद डोटासरा, पंजाब के एआईसीसी प्रभारी हरीश चौधरी, गुजरात के एआईसीसी प्रभारी रघु शर्मा के बाहर होने की संभावना है। पार्टी के शीर्ष पदस्थ सूत्र ने एएनआई को बताया कि इन नेताओं ने खुद पार्टी के लिए काम करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अजय माकन, प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल की राहुल गांधी के घर पर बुधवार को बैठक हुई थी। हालांकि राहुल गांधी इस बैठक में मौजूद नहीं थे।इस बैठक के बाद अजय माकन ने कहा था कि राजस्थान की राजनीतिक स्थिति, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य में 2023 के विधानसभा चुनाव के रोडमैप पर चर्चा की गई।उन्होंने एक सवाल पर मुस्कुराते हुए कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है जल्द हो जाए।
फिलहाल मंत्रिमंडल में नौ पद रिक्त
वर्तमान में, गहलोत के मंत्रिमंडल में नौ पद रिक्त हैं और अगर तीन मौजूदा मंत्रियों को हटा दिया जाता है तो एक दर्जन नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। कांग्रेस के लिए चुनौती निर्दलीय विधायकों को समायोजित करना है क्योंकि पार्टी के पास राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत नहीं है।
निर्दलीय विधायकों को भी मिल सकता है मंत्री पद
सूत्रों के मुताबिक उनमें से कुछ (निर्दलीय विधायक) को कैबिनेट में जगह दी जाएगी। सबसे खास बात यह है कि सचिन पायलट खेमे के 4-5 विधायकों को कैबिनेट में जगह मिलनी तय है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री और पीसीसी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने सचिन पायलट के पार्टी में समायोजन के बारे में फैसला नहीं किया है।
गौर करने वाली बात यह है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि राजस्थान मंत्रिमंडल में फेरबदल के बारे में फैसला उन्होंने आलाकमान पर छोड़ दिया है। गहलोत ने बताया कि उन्होंने अपने विचार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख दिए हैं। पार्टी आलाकमान जो भी फैसला करेगा वह सभी को मंजूर होगा।