पार्टियां पूरे साल राजनीतिक सुचिता और स्वच्छता की बात करती है मगर चुनाव आते ही उनके ये बातें हवा हवाई नजर आती है। चुनाव में जीत पाने के लिए किसी भी पार्टी को दागी उम्मीदवारों से भी परहेज नहीं होता। इस बार के चुनाव में भी तस्वीर अमूमन वैसी ही है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और कांग्रेस ने कुल मिलाकर 50 ऐसे उम्मीदवारों को चुनावी दंगल में उतारा है जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमें दर्ज है। चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में दागियों ने खुद इन आपराधिक मुकदमों की तस्दीक की है।
कब शुरू होगा राजनीतिक स्वच्छता अभियान ?
भाजपा ने 20 दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया है। सत्ता बरकरार रखने के लिए दागी उम्मीदवारों से भी इन्हें गुरेज नहीं दिखता। दागियों की सूची में विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल का नाम शामिल हैं। उनके खिलाफ तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार में गृहमंत्री रहते हुए जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। मामला फिलहाल कोर्ट में चल रहा है।
इसी तरह राज्य के चिकित्सामंत्री कालीचरण सराफ और चिकित्सा राज्यमंत्री बंशीधर बाजिया एवं विधानसभा में मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर, विधायक शंकरलाल शर्मा, झाबर सिंह खर्रा, मदन दिलावर,विकास चौधरी, खेमराज, मुकेश गोयल, संजय शर्मा कैलाश चौधरी, फूल सिंह मीणा, कैलाश चौधरी, चंद्रकांता मेघवाल, लादूराम, उदयलाल डांगी और झाबर सिंह खर्रा भी दागी प्रत्याशियों में शामिल है।
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सत्ता पाने की ललक में कांग्रेस ने भी 30 दागी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। कांग्रेस के दागियों की सूची में करण सिंह, मदन प्रजापत, हेमंत भाटी, राजेंद्र सिंह विधुड़ी, राकेश, अशोक चांडक, दौलत सिंह, वेद प्रकाश सोलंकी, लालचंद कटारिया, पुष्पेंद्र भारद्वाज, मनीष यादव, टीकाराम जूली, अशोक चांदना, धीरज गुर्जर, दर्शन सिंह, भरोसीलाल जाटव, राजेन्द्र विधुड़ी, रमेश मीणा, प्रकाश चौधरी, आनंदीराम, रामलाल, रामनिवास, मुकेश भाकर, चेतन चौधरी, विधायक महेन्द्रजीत मालवीय, विजयपाल मिर्धा, पुष्कर लाल डांगी, नंदाराम, सुभाष मील एवं रामलाल का नाम शामिल है।
हत्या और सबूत मिटाने के आरोपी परसादी लाल मीणा भी कांग्रेस के टिकट पर ताल ठोंक रहे हैं।