राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के एक गांव में बीते पखवाड़े में निमोनिया से कम से कम पांच बच्चों की मौत हो गयी है। अधिकारियों का कहना है आदिवासी बहुल इलाके में इन बच्चों को ‘झाड़फूंक’ के कारण समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाया जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।
यह मामला बांसवाडा जिले के खेडपुर (कुशलगढ़) गांव का है। गांव में पिछले एक पखवाड़े में बुखार और सर्दी जुकाम के कारण पांच बच्चों की मौत होने के बाद चिकित्सा विभाग के दल ने घर-घर जाकर जांच करने का सघन अभियान चलाया है। इसमें 101 लोगों की चिकित्सीय जांच में 25 लोग बुखार, सर्दी जुकाम से पीड़ित पाये गये।
बांसवाड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएंडएचओ) डॉ. पृथ्वी राज मीणा ने बताया कि खड़ेपुर गांव निवासी संदीप (दो), पूजा (सात माह), रितेश (तीन), अंजला (नौ माह) और प्रियंका (तीन) की पिछले एक पखवाड़े में सर्दी जुकाम और बुखार से मौत हो गई। उन्होंने बताया कि सभी बच्चों की मौत संभवतया: निमोनिया के कारण हुई है।
उन्होंने बताया कि सितंबर माह में सुबह के समय वातावरण में नमी के कारण मासूम बच्चे सर्दी जुकाम की चपेट में आ जाते हैं। आदिवासी इलाके में अंधविश्वास के चलते अभिभावक बच्चों का इलाज कराने के बजाय उन्हें झाड फूंक के लिये नीम हकीमों के पास ले जाते हैं। बच्चों के लिए अंतत: यह जानलेवा साबित होती है।
(इनपुट-भाषा)