राजस्थान में चार दिन तक चला बारिश-ओलों का दौर किसानों को हताश कर गया। प्रदेश के 28 जिलों के किसानों की खड़ी व कटी फसलें बर्बाद हो गईं। राजस्थान सरकार ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि 25 मार्च तक खराबे की रिपोर्ट मंगवा ली जाएगी और 20 अप्रैल तक मुआवजा दे दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वर्ष 2008 में घोषित पैकेज जारी रखते हुए जनहानि पर मुआवजा डेढ़ के बजाए तीन लाख करने तथा पशुधन पर मुआवजा अधिकतम सवा लाख रुपए तक करने की घोषणा भी की। इस बीच राजस्थान के सभी दलों के विधायकों ने अपना एक माह का वेतन किसानों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में देंने का निर्णय किया। राजस्थान विधानसभा में पूरा दिन फसल खराब होने का मुद्दा गूंजा।
राजस्थान में सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, जौ, जीरा, ईसबगोल, सरसों, लहसुन, धनिया और संतरे की फसलों को हुआ है। निलंबन वापस लेने के बाद कांग्रेस विधायक भी विधानसभा पहुंचे। प्रश्नकाल स्थगित कर ढाई घंटे किसानों की स्थिति पर चर्चा की गई। विधायकों की मांग थी कि इस मामले में सरकार नियमों से हट कर ज्यादा से ज्यादा और जल्द राहत किसानों तक पहुंचाए।
यह भी मांग की गई कि खराबे के सर्वे में विधायकों और जनप्रतिपिधियों को जोडा जाए। इसके बाद राजे ने कहा कि रविवार को ही सभी जिला कलक्टरों को खराबे के सर्वे करवाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
कांग्रेस ने तय किया है कि वह अपने ब्लाक स्तर के कार्यकर्ताओं से फसल खराब की जानकारी मंगाएगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने सभी जिला अध्यक्षों को कहा है कि वे ब्लॉक स्तर किसान को हुए नुकसान की वास्तविक रिपोर्ट मंगवाएं और प्रदेश कांग्रेस को भेजें।
पैकेज में यह - वर्ष 2008 के पैकेज में चार माह का बिजली बिल, आबियाना शुल्क माफ करने और लघु अवधि कर्ज को मध्य कालीन कर्ज में बदलने जैसी राहतें शामिल हैं।